वायुसेना के गायब हुए विमान से 100 से अधिक यात्राएं कर चुके पत्रकार ने क्यों कहा, ‘डरावना है ये!’

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पत्रकार संजय सिंह  {एएन-32 विमान (पाश्र्व में) से यात्रा करने के बाद रनवे से बाहर निकलते लेखक}

भारतीय वायुसेना का मध्यम परिवहन विमान एएन(एंटोनोव)-32  इन दिनों सुर्खियों में है। तीन जून को जोरहट (असम) से अरुणांचल प्रदेश स्थित वायुसेना के एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (एएलएच) के लिए उड़ान भरने वाला यह विमान अपने गंतव्य तक नहीं पहुंचा और रडार से गायब हो गया। विमान में 8 क्रू सदस्य समेत कुल 13 लोग सवार हैं, जिसमें से 5 सैनिक हैं। बतौर रक्षा संवाददाता मैंने इस विमान से सेना के तीनों अंगों (थल, वायु और जल) से संबंधित रिपोर्टिग के सिलसिले में तकरीबन 100 से अधिक यात्राएं की हैं, लेकिन इसके चौथे हादसे के बाद अब मुझे भी इस विमान में चढ़ने में डर लगने लगा है । 90 के दशक में तत्कालीन सोवियत संघ से खरीदे गए ये विमान निश्चय ही अब डराने लगे हैं। हालांकि मध्यम श्रेणी के ही नए परिवहन विमान सी-130 जे सुपर हर्कुलिस और सी-17 ग्लोबमास्टर अमेरिका से खरीद कर पिछले सालों में भारतीय वायुसेना को प्राप्त हुए हैं, लेकिन रूसी एएन-32 विमानों का जो बेड़ा भारत के पास है वह विशाल है और उसे एकदम से बाहर नहीं किया जा सकता।

8 जून को यह स्टोरी लिखे जाने तक विमान की गहन तलाश जारी है, लेकिन फिलहाल सफलता नहीं मिल सकी है। जबकि इसकी तलाश में वायुसेना ने अपने हेलीकाप्टर्स, सी-130जे सुपर हर्कुलिस परिवहन विमान और नौसेना ने अपने समुद्री निगरानी विमान पी-8आई को लगा रखा है। इस विमान को जिस स्थान पर पहुंचना था, वह चीन सीमा के काफी करीब है। वर्ष 1999 से लेकर अब तक इस विमान (एएन-32) का यह चौथा हादसा है।
इसके पहले वर्ष 2016 में चेन्नई से उड़ान भरकर अंडमान-निकोबार की राजधानी पोर्टब्लेयर के लिए रवाना हुआ एएन-32 विमान हिंद महासागर में लापता हो गया। इसके लापता होने के मामले में यह आशंका व्यक्त की गई कि विमान अत्यधिक खराब मौसम की चपेट में आकर बंगाल की खाड़ी में कहीं समा गया होगा। चूंकि दक्षिण में मानसून बंगाल की खाड़ी से आता है और वह सीजन भी मानसून का था, ऐसे में बादलों के चक्रवात में फंसने की आशंका व्यक्त की गई। तकरीबन एक माह तक चला तलाशी अभियान थकहारकर बन्द कर दिया गया और उसके सवार कू मेम्बर समेत कुल 29 लोगों को मृत मान लिया गया। जिसमें से 23 पैसेंजर और शेष छह क्रू मेम्बर थे। 23 में से 12 यात्री वायुसेना के, एक थल सेना का, एक नौसेना का, एक तटरक्षक बल का तथा आठ सिविलियन यानि कि परिवारजन थे।  विमान का सम्पर्क चेन्नई के ताम्बरम् एयरफोर्स स्टेशन से 8.30 बजे सुबह उड़ान भरने के तकरीबन 300 नाटिकल मील के बाद टूट गया था। जिस वक्त विमान से सम्पर्क टूटा वह 23 हजार फिट की ऊंचाई पर था। विमान को 11.45 बजे पोर्टब्लेयर पहुंचना था। के-2742 (काल साइन 330) नम्बर का यह एंटोनोव (एएन)-32 विमान सुलूर स्थित वायुसेना के 33 स्कवाड्रन का था, जो कि दक्षिण वायुकमान के अन्तर्गत आता है।
लेखक के साथ एएन-32 के अंदर का दृश्य
वर्ष 2006 में भी एक एएन-32 विमान पूर्वोत्तर की पहाड़ियों में क्रैश हो गया था। वह विमान भी अरुणांचल के सीमाई वायुपट्टी से उड़ान भरने के बाद हादसे का शिकार हुआ था। उसकी जांच में पायलट की चूक सामने आयी थी। सबसे पहले 1999 में भी दिल्ली में एक एएन-32 विमान लैंडिग के वक्त क्रैश हो गया था।
हालांकि भारतीय वायुसेना के लिए पूर्व सोवियत संघ से खरीदे गए एएन 32 विमानों को काफी भरोसेमंद माना जाता है। इनका रिकार्ड बहुत अच्छा है। वर्ष 1984 में 101 एएन-32 विमान सोवियत संघ से क्रय कर भारत आए थे। इनमें से 40 विमान 2010 में अपग्रेड करने के लिए कीव गए थे, जो कि अपग्रेड होकर 2011-2015 के दरम्यान आए। दस एनएन-32 विमान बीआरडी, कानपुर से अपग्रेड होकर साल 2015 आए में थे, जिसमें से एक विमान वह भी था जो अंडमान जाते वक्त हिन्द महासागर में समा गया था।

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