बहन अगर लिवर दान न करती तो रक्षा बंधन पर भाई न मिलता!

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प्रदेश की राजधानी भोपाल में रहने वाली एक बहन ने अपने भाई की जान बचाने के लिए उसे अपना लिवर डोनेट कर दिया। रक्षाबंधन से पहले बहन ने अपने भाई के लिए अपना फर्ज बखूबी से निभाया है। 15 अगस्त को रक्षाबंधन है लेकिन उससे ठीक एक महीने पहले बहन जाह्नवी ने अपने भाई को उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा तोहफा देकर रक्षाबंधन को और भी खास बना दिया है l

दरअसल भोपाल की आकृति इको सिटी में रहने वाली जाह्नवी दुबे कंसल्टिंग कंपनी KPMG में काम करती हैं। उनका मायका संस्कारधानी जबलपुर में है। कुछ दिनों पहले उसे पता चला कि उसके 26 साल के भाई जयेंद्र पाठक को करीब 10 दिनों से बुखार है और उतरने का नाम नहीं ले रहा है। परिवार के लोग इस बुखार को मामूली समझ रहे थे। लेकिन जब जयेंद्र को अस्पताल में भर्ती कराया गया तो पता चला कि उसका लिवर 90 फीसदी तक खराब हो चुका है। उसके बचने की संभावना अब नहीं है। डॉक्टरों की इस बात को सुन परिवार वाले सन्न रह गए और जब यह बात भोपाल में रहने वाली जयेंद्र की बहन को पता चली तो वह घबरा गई। उसे डॉक्टरों से पता चला कि जयेंद्र की बचने की संभावना सिर्फ 10 फीसदी है। लेकिन जाह्नवी को कुछ और ही मंजूर था। उसने डॉक्टरों से पूछा कि 10 फीसदी में भी जयेंद्र को कैसे बचाया जा सकता है। डॉक्टरों ने कहा कि इसे तुरंत ही दिल्ली के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराना पड़ेगा और जल्द से जल्द लिवर ट्रांसप्लांट कराना पड़ेगा तभी यह बच पाएगा।

डाक्टरों की बात सुनकर जाह्नवी का और उसके पति प्रवीण भी जबलपुर पहुंच गए। प्रवीण ने बताया कि उसकी पत्नी जाह्नवी पूरे रास्ते एक ही बात कह रही थी- मैंने अपने भाई को गोद में खिलाया है, वो मुझसे 15 साल छोटा है उसे किसी कीमत पर जाने नहीं दूंगी। मैं उसे लिवर दूंगी। प्रवीण ने बताया कि जबलपुर पहुंचने के बाद दोपहर करीब 12 बजे के बाद उसकी पत्नी एयर एंबुलेंस से दिल्ली के लिए अपने भाई के साथ रवाना हो गई। 15 जुलाई को सुबह जाह्नवी और उनके भाई का ऑपरेशन होना था। जबलपुर से कोई फ्लाइट नहीं थी, इसलिए वो और उनका 14 साल का बेटा ट्रेन से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। जाह्नवी के पति ने कहा कि डॉक्टरों को जाह्नवी के ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरू करने से पहले मेरी सहमति चाहिए थी। अस्पताल के एक बड़े डॉक्टर ने मुझे फोन करके बताया कि इस ऑपरेशन में जाह्नवी की जान भी जा सकती है। क्या आप इसके लिए तैयार हैं? मैंने कहा- हां, तैयार हूं। डॉक्टरों का कहना था कि- इस सर्जरी के 13 तरह के खतरनाक रिस्क हैं। लेकिन मैने कहा- ईश्वर पर मुझे पूरा विश्वास है, आप ऑपरेशन कीजिए। ऑपरेशन शुरू किया गया और फिर रात 9:30 बजे उनका सफलता पूर्वक ऑपरेशन खत्म हुआ।

प्रवीण का कहना है कि ऑपरेशन के बाद जयेंद्र को होश आ गया है। वह परिजनों से बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसमें अच्छी बात यह है कि जाह्नवी का लिवर जयेंद्र के शरीर में काम भी करने लगा है। अब वह पूरी तरह खतरे से बाहर आ चुका है। डॉक्टरों ने बताया कि जाह्नवी को अभी 15 दिन तक अस्पताल में ही रहना होगा और समय समय पर डॉक्टरों से जांच करवानी पड़ेगी |

 

 

राजकुमार यादव कि रिपोर्ट

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