गुजरात : कोरोना टीकाकरण में सबसे आगे है जनजातीय जिले

 

 

27 जिलों वाले गुजरात में 14 जनजातीय जिले हैं। दाहोद, बनासकांथा, पंचमाल, नर्मदा महीसागर आदि में कोरोना टीकाकरण को सफल बनाने के लिए जिला स्तरीय योजनाएं बनाई गईं। जिला टीकाकरण अधिकारियों को अधिकार दिए गए कि वह अपने क्षेत्र की दिक्कतों के आधार पर टीकाकरण की योजना बना सकते हैं। राज्य स्तर पर नियमित बैठक कर परेशानियों को सुना गया। अच्छे काम को सराहा गया, नए सुझावों को अपनाया गया और चिकित्सा संसाधन के तंत्र मजबूत किया गया, जिसकी सहायता से गुजरात में 45 साल से अधिक आयु वर्ग श्रेणी का साठ प्रतिशत टीकाकरण किया जा चुका है, यहां कोरोना टीकाकरण में जनजातीय समूह वाले जिले अव्वल हैं।

कच्छ के रण से सटे बनासकांथा जिले में 90 किलोमीटर तक की दूरी में कोई गांव नहीं मिलता, यहां प्रशासन से कोरोना टीकाकरण के लिए स्थानीय नेटवर्क की सहायता ली। छह करोड़ से अधिक आबादी वाले गुजरात राज्य में टीकाकरण की कई चुनौतियां हैं, अकेले बनासकांथा जिले की 13.27 प्रतिशत आबादी शहरी है, जबकि यहां की 86.7 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्र में आती है। जहां वैक्सीन के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना अपने आप में चुनौतीपूर्ण था। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे क्षेत्रों के लिए जिला और स्थानीय स्तरीय प्रतिनिधियों की सहायता ली। गुजरात के राज्य टीकाकरण अधिकारी और डिप्टी डायरेक्टर अरबन हेल्थ डॉ.नयन कुमार पोपटलाल जानी ने बताया कि जनजातीय समूह के बीच टीकाकरण के प्रति विश्वास बढ़ाने के लिए स्थानीय समूह की सहायता ली गई, बनासकांथा जिले में लगभग हर परिवार डेयरी के व्यवसाय में हैं, कोरोना वैक्सीन के लिए डेयरी प्रोडक्ट के नेटवर्क के जरिए कोरोना वैक्सीन से जुड़ी भ्रांतियों को दूर किया गया। दाहोद में इस काम के लिए अध्यापिकाओं की मदद ली गई, इस समूह ने प्रशासन और आम लोगों के बीच ब्रिज का काम किया। राज्य के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर आईएलआर (आइस लिंक्स रेफ्रिजरेटर) कोल्ड चेन और डीप फ्रीज होने का फायदा यह हुआ कि माइक्रो स्तर पर वैक्सीन का संरक्षण करना संभव हुआ। पैरामेडिकल स्टाफ की अगर बात करें तो जिले के हर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर एएनएम तैनात हैं।

डॉ. जानी ने बताया कि सभी पीएचसी पर एएनएम का एक भी पद रिक्त नहीं है, यही वजह है कि मानव संसाधन की कमी होना कभी समस्या ही नहीं रहा। महीसागर पुर के जिला टीकाकरण अधिकारी  और डिस्ट्रिक्ट क्वालिटी एश्योरेंस मेडिकल ऑफिसर डॉ. बिजेन्दर सिंह ने बताया कि कई जगह काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा, मालीबाड़ समुदाय में केवल बीस प्रतिशत टीकाकरण हुआ, इस समुदाय के एक अधिकारी ने कोरोना का वैक्सीन लगवाया इसके बाद लोगों को बताया गया कि वैक्सीन सुरक्षित है। महिसागरपुर का एक बड़ा समुदाय है जो दैनिक मजदूर है यह सुबह घर से निकलते हैं और रात को वापस आते हैं, ऐसे समुदायों को वैक्सीन लगाने के लिए रात में विशेष वैक्सीन सेशन लगाया गया। जिला स्तर पर वैक्सीन के लिए लोगों को एकजुट करने के लिए आंगनबाड़ी, आशा और स्वास्थ्य कर्मचारियों की सहायता ली गई, वहीं राज्य स्तर पर प्रशासनिक अधिकारी, स्वास्थ्य सचिव, यूनिसेफ और यूएनडीपी के प्रतिनिधियों की सहायता से कोविड टीकाकरण को संचालित किया गया।

कुछ कारगर जिला स्तरीय उपाय

– महीसागर पुर जिले में डीआईओ (जिला टीकाकरण अधिकारी) की पहल से हर दसवें दिन में आरटी पीसीआर जांच या कोविड वैक्सीन लगाने की पहल की गई, इसे स्थानीय दुकानदारों के लिए लागू किया गया।
– सोशल मीडिया पर प्रसारित कोविड वैक्सीन की भ्रांतियों को स्थानीय स्तर पर ही दूर किया गया, जिसमें मीडिया की सहायता ली गई।

– कुछ ऐसे समुदाय जिन्हें वैक्सीन को लेकर शंका थी, उस समुदाय से आने वाले अधिकारी और उनके परिवार को कोरोना का वैक्सीन देकर वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर आश्वस्त किया गया।

– तीन दिन के विशेष कैंप में 15000 सुपर स्प्रेडर स्वास्थ्य कर्मचारियों को कोविड वैक्सीन दिया गया।

कोविड वैक्सीन की दो करोड़ डोज दी गई

लगभग सात करोड़(6.48 करोड़) आबादी वाले गुजरात राज्य में 12 जून तक कोविड वैक्सीन की दो करोड़ डोज लगाई गई। 45 लाख लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज भी दे दी गई है। राज्य ने प्रशासनिक इकाइयों की सहायता से रोजाना तीन लाख वैक्सीन की डोज लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

 

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