राहुल ने दिया इस्तीफा, पार्टी बोली, नामंजूर!

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राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बने रहेंगे | लोकसभा चुनाव 2019 की हार के बाद कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई, जिसमें उनका इस्तीफा खारिज कर दिया गया | कार्यसमिति के सदस्यों ने राहुल गांधी से कहा कि ऐसे मुश्किल वक्त में पार्टी को उनके मार्गदर्शन की जरूरत है, लिहाजा वह पार्टी अध्यक्ष के पद पर बने रहें | बैठक में राहुल गांधी ने पार्टी के अध्यक्ष के पद से इस्तीफे की पेशकश की थी | कार्यसमिति की बैठक के बाद पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने इसकी जानकारी दी |

इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, मल्लिकार्जुन खड़गे, गुलाम नबी आजाद, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह मौजूद थे | राहुल गांधी ने कहा कि वह अध्यक्ष पद पर नहीं रहना चाहते लेकिन पार्टी के लिए बतौर कार्यकर्ता काम करते रहेंगे |

राहुल ने यह भी कहा कि उनकी जगह प्रियंका गांधी का नाम भी प्रस्तावित न किया जाए | साथ ही किसी बाहरी को पार्टी अध्यक्ष बनाया जाए | लेकिन कार्यसमिति ने राहुल की बात नहीं मानी | सुरजेवाला ने कहा, राहुल गांधी को अब यह अधिकार दिया गया कि वह पार्टी में अपने मुताबिक जैसे चाहे संगठनात्मक बदलाव कर सकते हैं |

सुरजेवाला ने कहा, कार्यसमिति ने देश के आगे मौजूदा समय में कई चुनौतियों पर संज्ञान लिया, जिसका हल नई सरकार को ढूंढना होगा | उन्होंने कहा, ईरान पर प्रतिबंध लगने के बाद तेल और बढ़ती महंगाई एक बड़ी समस्या है | बैंकिंग प्रणाली गंभीर स्थिति में है और एनपीए पिछले 5 वर्ष में बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिससे बैंकों की स्थिरता खतरे में है | एनबीएफसी, जिनमें लोगों की मेहनत की कमाई जमा है, उनकी आर्थिक स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हैं | निजी निवेश की कमी और कंज्यूमर गुड्स की बिक्री में तेजी से आई गिरावट के कारण अर्थव्यवस्था में मंदी का संकट मंडरा रहा है | नौकरियों के संकट का कोई समाधान नहीं निकल रहा, जिससे युवाओं का भविष्य खतरे में है |

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव 2019 में हुई हार की जिम्मेदारी ली | राहुल गांधी के बैठक में जाने से ठीक पहले मनमोहन सिंह और प्रियंका गांधी ने उनसे संगठन महासचिव वेणुगोपाल के कमरे में अलग अलग बात की |अंतिम समय तक राहुल को अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश करने से रोकने की कोशिश हुई |

2014 के मुकाबले इस चुनाव में कांग्रेस की सिर्फ 52 सीटें मिली हैं | पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 44 सीट जीती थीं | जबकि इस बार पार्टी को महज 8 सीट ज्यादा मिली है |
बता दें कि लोकसभा में कांग्रेस को विपक्ष का दर्जा भी नहीं मिलेगा क्योकि विपक्ष बनने के लिए भी कांग्रेस को 54 सीटें चाहिए जो की कांग्रेस के पास नहीं है | वहीं राहुल गांधी भले ही वायनाड से बंपर वोटों से जीत गए हों | लेकिन कांग्रेस के गढ़ अमेठी पर अब स्मृति का राज है | स्मृति ईरानी ने राहुल को अमेठी में 55 हजार से ज्यादा वोटों से मात दी है |

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