फ़र्ज़ी इलाज, फ़र्ज़ी बिल, उत्तराखंड के 13 अस्पतालों का “अटल” कांड

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उत्तराखंड की ‘अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना’ फर्जीवाड़े के तहत 13 अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस भेजा जा चुका है। दरअसल इस योजना की आड़ में राज्य के कई निजी अस्पताल पैसा बना रहे हैं। सरकारी इंश्योरेंस की रकम से जेब गर्म करने के लिए कई प्राइवेट अस्पताल फर्जी इलाज कर रहे हैं। कहीं फर्जी बिल बनाए जा रहे हैं तो कहीं मरीज़ के घर लौटने के बाद भी आईसीयू (ICU) के बिल बनाए जा रहे हैं। इस फर्ज़ीवाड़े में दोषी पाए गए अस्पतालों को योजना से हटाया जा चुका है। अटल आयुष्मान योजना के डायरेक्टर अभिषेक त्रिपाठी का कहना है कि अस्पतालों के पास आखिरी मौका है. अब पैसा नहीं चुकाया तो आगे कार्रवाई होगी।

फर्ज़ीवाड़े में दोषी अस्पतालों के खिलाफ कार्यवाई की जाएगी। 13 अस्पताल जिन्हे नोटिस भेजा गया था, उनमे से 8 निजी अस्पतालों में गड़बड़ी होने की पुष्टि हो गई है। आठों अस्पतालों को योजना से हटा दिया गया है और पैसे लौटाने के लिए कहा गया है। इन में से एक अस्पताल ‘कृष्णा हॉस्पिटल’ ने पैसा लौटाया है, जबकि 7 अस्पताल पैसा वापस करने को तैयार नहीं है। अब विभाग ने उन्हें आखिरी अल्टीमेटम में 15 दिन का वक्त दिया गया है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए बाध्य हो जाएगा।

कृष्णा हॉस्पिटल के अलावा 7 अस्पतालों को 31 लाख 80 हजार चुकाने हैं। ये अस्पताल हैं – अली नर्सिंग हॉस्पिटल, आस्था हॉस्पिटल, प्रिया हॉस्पिटल, जन सेवा हॉस्पिटल, जीवन ज्योति, विनोद ऑर्थो और देवकी नंदन हॉस्पिटल। 25 दिसंबर 2018 को शुरू हुई अटल आयुष्मान योजना के तहत इन 8 महीनो में कुछ निजी अस्पतालों ने घोटाला किया है। हाल ही में स्कीम के स्टेट सीईओ को बदल दिया गया। नए सीईओ का मानना है कि राज्य की सबसे बड़ी हेल्थ स्कीम में फ्रॉड रोकना उनकी पहली प्राथमिकताओं में से होगा।

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