पत्रकारों ने इस वजह से कर दिया वित्त मंत्रालय का “फाइनल” बॉयकॉट

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पहले बजट के बाद से उनके मंत्रालय में पत्रकारों की एंट्री पर ‘बैन’ लग गया था, पत्रकारों को इस बात का बहुत बुरा लगा था | पहले तो आधे से ज्यादा पत्रकारों ने उनके डिनर का बायकॉट किया था, लेकिन जब वित्त मंत्रालय ने डेली प्रेस कॉन्फ्रेंस या ब्रीफिंग की व्यवस्था शुरू कर थोड़ा मामला सुलटाने की कोशिश की तो उसमें भी कुछ ऐसा हुआ कि पत्रकारों ने उसका भी बायकॉट कर दिया। 2 अगस्त को ये पहला मौका था कि इस तरह की व्यवस्था की गई थी। वित्त मंत्रालय कवर करने वाले सारे पत्रकार वहां पहुंचे भी। हालांकि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस वित्त मंत्रालय में नहीं, बल्कि नेशनल मीडिया सेंटर में बुलाई गई थी। उस पर भी नई शर्त ये हैं कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में कैमरा ले जाने की इजाजत नहीं थी, यानी ये प्रेस कॉन्फ्रेंस ऑफ कैमरा ऑन रिकॉर्ड थी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए शाम 4:30 बजे का टाइम तय किया गया था। उससे पहले पत्रकार नेशनल मीडिया सेंटर पहुंच चुके थे। जब वे प्रेस कॉन्फ्रेंस वाले कमरे में पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस को वित्त मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी संबोधित करेंगे और ये प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं, बल्कि प्रेस ब्रीफिंग होगी यानी इसमें ये अधिकारी केवल एक बयान पढ़ेंगे, पत्रकार उनसे सवाल नहीं पूछ सकेंगे।
इससे बाद पत्रकार आग बबूला थे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जब वे सवाल ही नहीं पूछ सकते, तो प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने की जरूरत क्या थी? वित्त मंत्रालय केवल प्रेस रिलीज जारी कर देता। उसके बाद तो वित्त मंत्रालय में उनकी एंट्री पर लगे बैन का मुद्दा भी उठाया गया। दिलचस्प बात ये है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन भी पहुंचे, पर कुछ बताए बगैर वे वहां से चले गए। प्रेस कॉन्फ्रेंस का बॉयकॉट होने से वित्त मंत्रालय के अधिकारी, कर्मचारी भी थोड़ा असहज महसूस कर रहे थे।

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