Wednesday, March 3, 2021

Exclusive : चंद्रशेखर आजाद के साथ न्यूज नशा का UN-CUT INTERVIEW

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देश की राजनीति में कई युवा चेहरे शामिल हो रहे हैं उसी में एक चेहरा जो दलित राजनीति को आगे बढ़ाना चाहता है और कई बार गिरफ्तार हो चुका है । चंद्रशेखर आजाद , आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और भीम आर्मी में युवाओ को लगातार शामिल कर रहे हैं ।

चंद्रशेखर आजाद के साथ न्यूज नशा का साक्षात्कार …

 

विनीता यादव (न्यूज नशा) : देश की राजनीति का एक ऐसा युवा चेहरा जो दलित समाज कि दशा और दिशा में काफी बड़ा योगदान देने वाला है लेकिन क्या वाकई में ये चेहरा सबसे सशक्त नेता बन जाएगा? जी हां मैं बात कर रही हूं चन्द्र शेखर आज़ाद की और वो हमारे साथ है । सवाल उन्हीं से पूछते है जिस तरह लोगो की उम्मीदें आपके पास आने लगी है। मैंने देखा खासतौर से की युवा आपकी चर्चा करते और कहते है कि जो मायावती नहीं कर पाई या जो उम्मीद उनसे थी वो अब आप पूरी कर देंगे ये कनेक्ट जो बना है यूथ के साथ थोड़ा सा इस बारे में बताइए।

चंद्रशेखर आज़ाद(असपा )- देखिए समय बदल रहा है उनकी जो उम्मीदें है वह बढ़ रही लंबे समय से हाशिए पर रहा शेड्यूल कास्ट, शेड्यूल्ड ट्राइब, बेकवर्ड और माइनॉरिटी के जो नव-जवान वो अब अपनी हिस्सेदारी चाहते हैं, वो देश को आगे बढ़ाने के लिए कुछ करना चाहते हैं वो मौका चाहते हैं। अगर उन्हें मिले तो कुछ अच्छा करके दिखाएं

काफी लंबे समय से युवाओं को नजरअंदाज किया गया है भारतीय राजनीति से वो युवाओं को यह कहकर पीछे हटा देते हैं तमाम दल, की वो अभी नौजवान है उनको अनुभव नहीं है ।हम ने उनको मौका दिया है वो बड़ा अच्छा काम कर रहे है ।तो उनकी उमीदे और बड़ रही हैं ।

जो तमाम पार्टियों में नौजवान नेता थे, पीछे सिर्फ झंडा पकड़ते थे वो अब आगे काम करना चाहते वो चाहते एक बार मौका मिले क्यूँकि मै ये समझता हूँ की देश कि सीमा पर नवजवान चाहिए देश कि रक्षा के लिए बॉर्डर कि सुरक्षा के लिऐ , तो हमे देश में नौजवानों को बहुत ज़्यादा ज़रूरत है ।

जब किसी को 60साल बाद गवर्नमेंट रिटायर कर देती लेकिन कहते है कि 60 साल बाद राजनीति हो रही है। मुझे लगता है कि नौजवानों को मौका देना चाहिए। सीखने को समय मिलेगा तो वह अच्छा कर पाएंगे क्क्यूँकि वो कोरे का कागज है ।

कोरी किताबे है जैसा हम लोग स्कूल में जाते है स्टार्टिंग में जैसा टीचर हमे मिलता जैसा एटमॉस्फियर हमे मिलता है। वैसे ही हम बन जाते हैं।उसी तरह से जैसा नवजवानों को राजनीति और अनुभव करने का समय मिलेगा वैसे ही वो राजनीति करेंगे ।

तो एक अच्छी और सशक्त राजनीति जो देश हित मे हो जो एक अच्छा समाज बनाए जो गरीबी की परेशानी को समझे और उनके लिए हल निकले जो उनसे सिर्फ वोट का रिश्ता ना रखे सुख दुख मे साथ खड़े हो ऐसी राजनीति को होनी थी ।

जो उनके मुद्दे पे बात करे जब सवाल हो तो धर्म की चादर ना और ओड्ड ले ऐसी राजनीति होनी चाहिए थी। और आने वाले समय में अच्छा प्लेटफार्म बने युवाओं के लिए।

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विनीता यादव (न्यूज नशा) – लेकिन मुझे लगता जितने सीधे तरीके से आप अपनी बात कह दी है उतने तरीके से पुरानी पार्टियां और पुराने नेता इसे स्वीकार नहीं कर रहे , बार बार गिरफ़्तारी हो जाती है ?

चंद्रशेखर आज़ाद(असपा ) – देखिए मै दो बाते साफ करना चाहता हूं वो आपको समझ आएगी मुझे नेताओं को समझाने की जरूरत नहीं मुझे जनता को समझाना है उसे समझ में आ रही है क्योंकि नेता जो है जनता से होता है जनता नेता बनाती है यह लोकतंत्र है प्रजातांत्रिक व्यवस्था है तो जो जनता है जिसे नेता बनाना चाहती है वह बनता है राजा का बेटा राजा नहीं बनता है

जिसके साथ जनता होती है वह राजा बनता है हर एक या दो टर्म के बाद प्रधानमंत्री बदल जाते हैं। हर एक टर्म के बाद चीफ मिनिस्टर बदल जाते हैं। उसी क्षेत्र के विधायक सांसद बदल जाते हैं। आप गिरफ्तारी की बात कर रही है ।जो सत्ता में सरकारे बैठी हैं।

वो डेमोक्रेसी को नहीं मानती हैं। वह डेमोक्रेसी का मजाक उड़ा रहे है। रूप का अधिकार संविधान हमें देता है जहां तक मैं जानता हूं। शहीद करतार सिंह 19साल के थे जब उन्हें सहदात दी । शहीद-ए-आज़म सरदार भगत सिंह 23साल के थे ।

शहीद शिरोमणि उधम सिंह नौजवान थे। एक ऐसी यूनिट जिसको इतिहास में आतंकवादी और क्या क्या नाम से किया गया मगर ज़िम्मेदारी वो थे ।इस लिए उन्हें गिरफ्तारी भी दी और हंसते हंसते फांसी कबूल करी क्यूँकि वो अपने देश से प्यार करते थे और अंग्रेज़ो कि गुलामी नहीं चाहते थे ।

तो कब तक ये नेता हमे रिजेक्ट करते रहेंगे गुस्सैल नवजवान कह के गैर – अनुभवी कहे ,हमे फर्क नहीं पड़ता । ये हमारी मेहनत पर डिपेंड करता हम कैसा कर पाते हैं।

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विनीता यादव(न्यूज नशा ) – लेकिन विरोध करने को आंदोलनजीवी कहा गया ?

चंद्रशेखर आज़ाद (असपा )- आप ये भी तो समझिए देश आज़ाद कैसे हुआ ।
देश कि आज़ादी में बड़े बड़े आंदोलन हुए ।आंदोलनों से बड़े नेता पैदा हुए उन नेताओं को जानता ने स्वीकार किया ।उनको सत्ता में आने का मौका मिला ।

लंबे समय तक शासन किया उन आंदोलन कि वजह से अंग्रेज़ यहां से गए और अगर बात अभी कि करूं तो एक आंदोलन हुआ जिसको अन्ना हजारे का आंदोलन कहां जाता है ।देश में बड़ा चर्चित आंदोलन हुआ उसके बाद कांग्रेस को सत्ता से जाना पढ़ा और बीजेपी सत्ता में आयी । आंदोलन तो लोकतंत्र को खूबसूरती है ताकत है ।

मै बाबा साहब अम्बेडकर को मानता हूं बाबा साहब ने कहा है सत्ता के साथ विपक्ष का बहुत बड़ा अहम रोल है तो जब विपक्ष काम ना कर रहा हो या कर भी रहा हो या किसी मजबूरी से सड़कों पे ना आ पा रहा हो तो जनता को रहना चाहिए ।

और तमाम बहुजन नेताओ ने कहा कि संसद अगर तानाशाह हो जाए या सरकार तानाशाह हो जाए तो सड़क सुनी नहीं होनी चाहिए तो लोकतंत्र में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं । अधिकार देता है और वह हम कर रहे। और यह सिर्फ इंडिया में थोड़ी ना है अभी अमेरिका में क्या हुआ जब ब्लैक्स लिव्स मैटर पर एक आंदोलन होता है।

जॉर्ज फ्लोयड कि हत्या होती है तो पूरा अमेरिका बाहर निकल आता है। व्हाइट हाउस पे लिखा जाता है ब्लैक लाइव्स मैटर वहा के राष्ट्रपति जो है उन्हें बंकर में छिपना पड़ता है यह जनता है यह मालिक है। इन मुद्दों पर बात करनी पड़ेगी और सरकार भाग नहीं सकती हम हर बार पकड़कर लाते हैं।

सरकार भाग जाती है धर्म की चादर ओढ़ लेती है कभी झूठे राष्ट्रवाद चादर ओढ़ लेती है। तो मै सीएए एनसीआर पर इन्हे पकड़ कर लाता हूं ।
देश में ये नफरत कि राजनीति नहीं चलेगी जब वो जब वो आरक्षण पे हमला करते तो मै उन्हें पकड़ कि अभी शेड्यूल कास्ट , बेकवर्ड , माइनॉरिटी के लोग है उनकी हालत इतनी अच्छी नहीं हुए कि आरक्षण को हटना चाहते हैं जब वो रोज़गार कि बात करते तो हम उनको पकड़ के लाते है

।रोज़गार देना पड़ेगा गैर जिमेदारी नहीं चलेगी तब तो आप दो दो करोड के वादे कर रहे थे कि दो करोड़ रोज़गार देंगे वो भी नहीं से वो भी छीन लिए 1990से अब तक 64 लाख सरकारी नौकरियां ख़तम हुए आर्थिक सुधार के नाम पे जनता का सुधार तो नहीं हुआ आज तक 84 करोड़ लोग ऐसे है

जिनको सरकार सस्ता रासन देते यानी की वो गरीब रेखा से नीचे जीवन जीते फिर आर्थिक सुधारक किन का हुए है नेताओ का तो हो गया है बीजेपी ने बड़े बड़े ऑफिस बना लिए है ।आरएसएस के बड़े बड़े कार्यालय बन गए है ।हजारों करोड़ हर चुनाव में लगा रहे है तो ये पैसा कहा से आ रहा है आर्थिक सुधार किसका हुआ

विनिता यादव (न्यूज नशा) आप युवा नेता होने के बाद दलित समाज की आवाज़ उठा रहे लेकिन आप हेलिकॉप्टर में जाते है और इतना पैसा आ रहा इस तरह के सवाल बीजेपी पे उठाते फिर वो आप पे इस तरह के सवाल कर रहे है

चन्द्रशेखर आज़ाद (आसपा):अच्छा है ना सवाल तो जरूरी है पार्लियामेंट सेशन होते तो सवाल ही तो होते हैं बाहर हो जनता सवाल ही तो करती है सवाल अगर आज हम पूछते है इसके सरकार के पेट मे मरोड़ नहीं होना चाहिए सरकार पूछना हमरा अधिकार है हम वोट देते हैं टैक्स देते हैं हम इस देश के नागरिक हैं हमारा अधिकार है जिस सरकार को चुना गया है उससे सवाल पूछना।

बाकी सरकार के पास सारी एजेंसी या है जांच करा ले और अपने नेताओं की भी जांच करा ले जब पिछली बार जब चुनाव लड़ने आए थे उनका आर्थिक बजट उनकी क्या आर्थिक सशक्तिकरण है क्या- क्या आर्थिक रिसोर्सेज है उनके पास है पास 5 साल साल तक कि और मेरे भी करा लीजिए एकाउंट भी चेक करा लीजिए क्या दलित चॉपर में नहीं चल सकता ये तो बाबा साहब ने अधिकार दिया है ये तो इस सरकार ने तो नहीं दिया l

तो आज दलित काम कर रहा पैसे कमा रहा दलित को अगर हटा के के सोचे तो किसी कम्युनिटी का नवजवान है उसका एक सपना है वो कुछ करना चाह रहा उसकी मेहनत से क्यों दिक्कत हो रही दलित क्या इंसान नहीं होता उसे वहीं अधिकार है जो स्वर्ण को है किसी जाति धर्म का बराबर का अधिकार है |

उसके मेहनत पे डिपेंड करता है तो मै चापर में भी चलूंगा और अपने लोगो के लिए चॉपर कि इंतज़ार करूंगा मैं तो ये भी कहता जो कमजोर वर्ग का नवजवान है जो शुख सुविधा मुझे मिल रही उसे मिलना चाहिए और उनके लिए ही राजनीति कर रहे हमारे राजनीति का उद्देश ये है आर्थिक सशक्तिकरण हो सब लोगो का समनता आए धर्म जाति के आधार पे झूठे राष्ट्रवाद के नाम पे लोगो की हत्या ना हो लोगो का सोसड बंद हो और जिसकी जितनी संख्या भारी उतनी हिस्सेदारी लागू हो एक बड़ा समाज ये सोच के ने डरा कि उसको रोज़ सबूत ना देना पड़े की इस देश से प्यार करता या नहीं करता किसी के अंदर असुरक्षित कि कल उसको ये देश छोड़ के ना जाना पड़े|

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विनिता यादव (न्यूज नशा): एक सवाल यह उठता है आपके इंटरव्यू से पहले मेरी कुछ उन लोगों से बात हुई जो आप के समर्थक हैं और आप से जुड़े हैं तो हमने सवाल पूछे तो उनका सवाल यह था क्युकी वो और आपसे जुड़ा सा महसूस करते हैं उनका कहना था यह जो असमानता की बात है जो आप बता रहे हैं वह आज भी महसूस कर रहे हैं इस तरह की तस्वीरें कब खत्म होगी क्योंकि हमारा संविधान तो सबको बराबर का हक देता है आपको कहां लगता की कमी है क्योंकि तमाम सरकारें आई और गई उसके बावजूद भी बराबरी नहीं हो सकी और अगर जमीन पर इस तरह की बराबरी नहीं हो सकी तो कहां कमी है और किसकी कमी है ?

चन्द्रशेखर आज़ाद (आसपा): बड़ा अच्छा सवाल पूछा है आपने देखिए मैं जो आपसे कह रहा हूं यह बहुत ही अटपटा लगेगा मगर यह सत्य है हत्या आप समझती होंगी अगर जज जो ऑर्डर करते फासी का अगर ऑर्डर को हटा के अगर पिछे से उनकी नियत को हटा लिया जाए तो ये एक हत्या होगी अगर उनका न्याय देने नियत ना हो उस नियत को हटा लिया जाए तो वो ऑर्डर हत्या हो जाएगी तो ये जो सरकारें हैं जहा इतनी जाति व्यवस्था में भेद भाव है जो आज तक भी इंसान और जानवर में फर्क नहीं खोज पाई ।

जाती को लेकर जो लोगो के दिमाग में असर है वो आज भी इतना भेद भाव करते है गोड़ी पे चड़ने पे शादी करने से आने जाने से साथ बैठ कर खाना खाने से तमाम तरह कि परेशानियां आप आगे भी बढ जाओ आईएएस और प्रशासनिक सेवा में भी आ जाए तो भी जाती के थे सोसध सहना पड़ेगा तमाम तरह की परेशानियां स्कूल कॉलेज से लेकर आप कमरा लेने जाओ या नौकरी में तो जाती बता कर दिया जाता है।

आज भी शेड्यूल कास्ट की महिलाओं के हाथ से खाना खाने से परहेज़ हो जाती हो उनको नौकरियां नहीं मिलती तो वहा बदलाव कि नियत ना हो तो कुछ नहीं हो पायेगा जो अभी तक सरकार थी उसकी नीयत नहीं थी ये किसी राज्य सरकार का काम नहीं है यह केंद्रीय सरकारों का काम है वह चाहते तो होता संविधानिक प्रावधान है आर्टिकल 14 ,आर्टिकल 15 कि धर्म जाति लिंग या स्थान के नाम पर भेदभाव नहीं होता जबकि होता है ।

आप और मैं सब रोज़ देखते है कोई व्यक्ति यहां पैदा हो गया है तो उसका शोषण करने का अधिकार किसी को नहीं है लेकिन मैं रोज अखबार पढ़ता हूं और अगर मैं बात उत्तर प्रदेश की करू तो रोज वहां दो से 4 महिलाओं का हर जिले में बलात्कार हो रहा है या उन या उनकी हत्याएं हो जा रही है या शारीरिक शोषण हो रहा है।

अब यह अधिकार किसने दिया किसी को कोई किसी को शोषण करे यह तो कानून का राज है तमाम तरह का सिस्टम है आखिर क्यों अपराधियों में डर नहीं है उससे साबित होता है की व्यवस्था नहीं है चाहा नहीं है लोगों के पास नियत नहीं है और नीति नहीं है इस वजह से नहीं हो रहा है जब इनकी तरह सोचने वाले लोग जैसे किसान अभी सड़कों पर है और किसान वो बिल नहीं चाहते थे मगर बिल लागू कर दिए गए। कानून बना दिए गए किसान विरोध कर रहे हैं मुझे ऐसा लगता है कि किसान वहां नहीं है अगर किसान संसद में होते तो ऐसे बिल कभी नहीं आते|

विनिता यादव (न्यूज नशा): लेकिन कुछ नेताओं ने आवाज़ उठाई है?

चन्द्रशेखर आज़ाद (आसपा):: वो नेता वो है जो अभी सरकार में नहीं है यानी को सरकार में किसानों कि हिस्सेदारी नहीं है जो लोग है वो किसानों कि हितैषी नहीं है ।मुझे लगता वो लोग जो नियत नियति रखते है वो नहीं है ।

जिस दिन वो वहां होंगे उनकी सरकार आएंगी तो उनके लिए काम होगा और मुझे लगता ये ख़ुद ही करना पड़ेगा इसी लिए राजनैतिक दल बना के इस जनता को तैयार करने का काम किया है मै चाहता हूं इस देश का 90% गरीब एक हो जाए और उन 10% अमीरों से अपनी हिस्सेदारी छीन ले जिनका कुत्ता एसी में सोता है मुझे कुत्ते से कोई परहेज नहीं है जानवर जो है वह जानवर है उसको सुविधाएं मिल नहीं है लेकिन यहां गरीब भूख के कारण मर जाता है।

इस देश में किसान फांसी लगाता है क्योंकि वह कर्ज नहीं दे पाता है यहां अमीरों के बड़े-बड़े लोन माफ हो जाते हैं।₹10000 के लिए प्रशासन के लोग उसे बंद कर देते हैं। देश के अन्नदाता जो इन्हें रोटी खिलाता है उसके साथ ऐसा होता है ।उन लोगो को जिन्हें संविधान के आधार पे बोलने साथ बैठने का अधिकार मिला है उन्हे बहुत झेलना है अभी !

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विनिता यादव (न्यूज नशा): आप ने अभी आर्टिकल 14 का जिक्र किया तो ये जो अग्रेसन वाली छवि बन रही है मेरा सवाल इस छवि को लेकर है जहा पर आप अपनी बात तो कहते है लेकिन गुस्सा बराबर आता है ।ये कौन सा गुस्सा है ।ये विशेष रूप से नेता वाला है या मैंने आपकी कि तस्वीरें देखी जिसमे आपकी पूरा गांव से पूरा आपका बचपन बिता और जो चीज अपने कैसे की उस से जुड़ा हुआ है कहा से आया गुस्सा इतना ।

चन्द्रशेखर आज़ाद (आसपा):देखिए जब आप अपनी बात को कहते गंभीरता से नहीं लिया जाता आर्टिकल 15 देखी होगी मैंने काफी करीब से नहीं देखी फिल्मों का शौक नहीं रखता क्यूकी काम बहुत है ज़ायद है ।में इस चीज़ को बहुत बेहतर तरीके से समझा सकता हूं कि आपको जब नहीं सुना जाएगा आप के मुद्दों पर बात नहीं होगी आपके बातो पे जो है चर्चा नहीं होगी तो आपको अपनी बात रखना पड़ेगा और गुस्सा मेरा बेवहार है ।

में जान बूझ कर गुस्सा नहीं करना चाहता मगर मुझे लगता लोग सुनने को तैयार नहीं तो ये गुस्सा मेरा विरोध है जो मुझे लगता आदमी सड़को पर कब आता जब उस से उम्मीद ख़तम हो जाती है ।तो जो वर्तमान में सरकारें है ।

न्याय की उम्मीद खत्म हो चुकी है उत्तर प्रदेश में पुलिस के जवान को माफियाओं ने मार दिया दूसरी तरफ दरोगा जी को खूब पीटा विक्रम कांड जिसमें 8 पुलिस वालों की निर्मम हत्या हो गई कोई सुरक्षित नहीं है मुझे अपने लोगो की चिंता होती है तब मैं अपनी बात को रखता हूं मेरा एक नेचर है अगर आप उसे गुस्सैल स्वभाव में देखें तो अलग बात है

देखिए सब लोग सम्मान रखते हैं मैं भी किसी का अपमान नहीं करता लेकिन अपनी बात को रखना चाहता हूं क्योंकि वह जरूरी है क्योंकि सरकार को इसलिए सुनना पड़ेगा हमारे लोगों ने हमें आवाज दी है वह मुझे ताकत देते हैं तो मैं अपनी बात को रख पाता हूं

विनिता यादव (न्यूज नशा): आरएसएस खुद को एक ऐसे संस्था बताती है जैसे आपने परेशानियां बताई है राज्य में इन सब का कहीं ने कहीं एक जमीन पे उतर कर मदद करती रहती है ।जैसा वो जिक्र करते है की आज़ादी के वक्त भी लोगो कि बड़ी मदद कि थी ।जब भुखमरी पड़ी तब भी मदद कि तो आपको नहीं लगता सरकार बीजेपी कि है तो ऐसे में आरएसएस भी जमीन पर कुछ मदद कर रहे होगी लोगो कि परेशानियां हल करने के लिए ?

चन्द्रशेखर आज़ाद (आसपा):मगर जितना उन्होंने कहा था क्या कुछ बदल पाया क्या कुछ भी बदलाव हुआ क्या उन्हे जो उन्होंने समय समय पे मदद की आज ज़मीन पे कहीं है कथनी और करनी में भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस के लोगो का जमीन आसमान का अंतर है ।जो वो लोग कहते वो बिल्कुल नहीं करते आजादी कि लड़ाई में उनका कितना योगदान है ।

ये पूरी दुनिया जानती है उस में सावरकर साहब कि चिट्ठियां बहुत बड़ा योगदान देती है तो मुझे उनको टिप्पणी करने का या आलोचना करने को अधिकार नहीं क्युकी मै उसका हिस्सा नहीं मैं भीम आर्मी हिस्सा ही आज़ाद समाज पार्टी का हिस्सा हूं मै इस देश के वंचित वर्ग का हिस्सा हूं मुझे उनपे ज़ायदा बात करनी चाहिए ।

और मुझे लगता है हमे ज़ायद काम करने कि जरूर है ।हमे ज़ायद लोगो को मौका देने कि जरुरत है ।एक सशक्त नेतृत्व तैयार करने की जरूरत है जिसमें महिलाओं को भी अब तो संविधान ने भी बराबर का अधिकार दिया है महिलाओं को मगर क्या संसद में महिला और पुरुष की संख्या एक समान है क्या किसी सदन में बराबर की संख्या में महिलाएं है?

तू ऐसा नहीं कि महिलाओं में नेतृत्व करने की क्षमता नहीं है इतने हक क्यों नहीं दिया गया है क्योंकि कि इनकी नीति नहीं है मगर इन्हें महिलाओं का नेतृत्व स्वीकार नहीं करेंगे मैंने तो अपनी एक महिला नेता के नेतृत्व में काम किया है ।

यूपी के अंदर हमरे अंदर क्षमता है लेकिन परिवर्तन प्रकृति का हिस्सा है तो मुझें लगता है हम और मजबूती से काम करेंगे और जो काम कर रहा है जहा कर रहा है जिस नियत से कर रहा वो अच्छा कर रहा है l

ये लोग अगर अच्छे होते तो देश में अलग ही परिवर्तन होता जहां से हम आजाद हुए थे आज भी वही है कुछ नहीं बदला है जो का तो है जितना आप हायर सेक्टर के तरफ जाएंगे सचिवालय देख लीजिए जो केंद्रीय विश्वविद्यालय है सब टॉप लेवल पर शेड्यूल कास्ट माइनॉरिटी के लोग नहीं गए हैं । आप देख सकती हैं आर्मी का हेड कौन है।

सीबीआई का हेड कौन है इनकम टैक्स का देख लीजिए सब इनके अपने लोग हैं अब यह लेटर एंट्री करके अपने लोगों को और भर रहे जो कानून संविधान के हिसाब से नहीं बल्कि इनके इशारों के मुताबिक काम करें।

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विनिता यादव (न्यूज नशा) :जिस पर आप सांसद घेराव की बात कर रहे है ।

चन्द्रशेखर आज़ाद (आसपा):जी हां प्राइवेटाइजेशन के नाम पर एक बड़ा स्कैम चल रहा है। जिन बिजनेसमैन से यह चंदा लेते हैं उनसे यह पहले डील करते हैं। आपको यह सरकारी उपकरण देंगे फिर उस उपकरण को धीरे-धीरे कमजोर किया जाता है उसके रखरखाव और आगे बढ़ाने के नाम पर कोई काम नहीं किया जाता है अंततः उसको घाटे में दिखाकर उसको बेचने की प्रक्रिया प्रस्ताव में लाई जाती है और फिर बेच दी जाती है और चुनिंदा कंपनियों को फिर टेंडर दी जाती है

वह पैसे नहीं देती है वो बिजनेस- मैन उस टेंडर के नाम से बैंक से अपनी लिमिट बड़ा लेता है बैंक से लोन उठा कर सरकार से वह किस्त बाध लेता है और कुछ दिन बाद अगर लोन नहीं देता है तो फिर सरकार उसका लोन माफ कर देती है सरकारी उपकरण का मालिकाना हक प्राइवेट कंपनियों को चला जाता है|

विनिता यादव (न्यूज नशा) :इसको चैलेंज करने के लिए क्या आप कोर्ट जा सकते हैं आप पर तो खुद इतने मुकदमे दायर हो चुके हैं?

चन्द्रशेखर आज़ाद (आसपा):मै तो बहुत कुछ करने वाला हूं मगर आपने देखा सुप्रीम कोर्ट के जो जज है अच्छे फैसले देने के बाद स्टेट ऑफ काउंसिल चले जाते हैं तो समझ आता है की जड़े कहीं जड़े गहरे हो चली है जब रंजन गंगोयी जैसे लोग यहां से रिटायर होते हैं और सीधे राज्यसभा की तरफ चले जाते हैं तो मेरा विश्वास और सशक्त हो जाता है कि सरकार का हर जगह हस्ताक्षेप है

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विनिता यादव (न्यूज़ नशा):आपके ऊपर खुद इतने केस हो चुके है ।कितने केस की संख्या हो चुकी है अब तक ?

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा): गिनने कि आदत छोड़ दिया है देश से ज्यादा प्यार है अपनी परवाह होती तो मुकदमो की परवाह करता मेरा बस एक ही सिद्धांत है कि सरकार के तानाशाही के आगे झुकना नहीं

विनिता यादव (न्यूज़ नशा): :आज़ाद समाज पार्टी बुलंदशहर में तीसरे नंबर पर आई जिस महिला के बात आप कर रहे जिनको अपने आगे रखा यहां पर भी आप उनसे बस एक कदम पीछे थे

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा):कोई फर्क नहीं पड़ता पहला कदम है पहला कदम है राजनीति में इस से पहले मैंने उनके नेतृत्व में राजनीति कि है मै कुछ अच्छा करने का प्रयास कर रहा हूं अब मेरा काम ये है जो अच्छे लोग और जनता के बीच काम करने वाले लोग है जो उनके सुख दुख को देखते है उनको काम दिया जाए उनको मौका दिया जाएगा|

विनिता यादव (न्यूज़ नशा) : मायावती आपके कदमों कि सराहना नहीं करती है

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा):नहीं मेरी मां भी हमेशा डाँटती रहती है मुझे इस चीज़ कि परवाह नहीं बड़े है मेरे परिवार के इस से मुझे दिक्कत नहीं मै कहना चाहता हूं कि सबसे जरूरी जो है कि मै अपने लोगो को कहना चाहता हूं कि मै उनके हूं मै उनका हूं और उनके लिए हूं और जब तक जिऊंगा उनका रहूंगा उनको मेरे रहते निराशा नहीं हाथ लगेगी|

 

विनिता यादव (न्यूज़ नशा): मायावती ने आपको दलित नेता के तौर पर एक फर्जी नेता बोल दिया लेकिन अपने कहा मै सम्मान करता हूं आज भी कह रहे है ??

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा):देखिए कुछ बातों को लेकर उनकी तरफ से मेरे लिए नाराजगी हो सकती है मगर मुझे इस से ज़्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला है क्युकी उनकी नाराजगी में भी सीख हो सकती मेरे लिऐ तो मै हर चीजो को प्याश करता हूं सकारात्मक लु तो मुझे उन्होंने बहुत कुछ शिखाया है ।

आगे मेरा प्याश है कि जो लोग मुझे मानते फॉलो करते उन्हें भी शिखाऊ देश के नौजवानों को सीखना चाहता हूं कि उनको अपने हकों और अधिकारो के लिऐ लड़ना चाहिए क्युकी बिना मांगे यहां कुछ नहीं मिलने वाला और उनको लड़ना चाहिए देश के लिए कुछ अच्छा ना कर दे

तब तक उनको लगातार जारी रखना चाहिए उनको चाहिए कि देश के संविधान कि सुरक्षा करे वो अपने देश को मजबूत करने के लिए लड़े अपने देश से झूठे वादे ना करे वो खुद से भी झूठे वादे ना करे अगर वो राजनीति में आते है तो आना चाहिए अगर वो राजनीति नहीं करेंगे तो अयोग्य लोग इस देश मे सत्ता में बैठ कर शासन करेंगे जिसका खामियाजा वो देश को भुगतना पड़ेगा ।
मै अपने देश को ताकतवर देखना चाहता हूं ।

विनिता यादव (न्यूज़ नशा):यूपी के उप चुनाव बिहार के चुनाव अपने लड़े अब जो चुनाव है असल परीक्षा का 2022 का जो चुनाव आयेगा उसके लिए काफी हलचल शुरू हो गई है यूपी में छोटे दल को है मुलाकात कर रहे है गठबंधन की बात कर रहे हैं कई बड़े दल है जिनका कहना है कि वह छोटे दलों के संपर्क में है तो आप 2022 की दिशा में काम कर रहे हैं??

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा): मुझे आप से बस एक सवाल कि वो छोटे दल को परिभाषा क्या होती और बड़े दल की परिभाषा क्या होती ?

विनिता यादव (न्यूज़ नशा):“जाहिर है कि जो कम सीटों के साथ जिन्होंने अभी तक चुनाव जीता होगा उसकी बात कर रहे है ।

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा):मैंने इस देश मे बीजेपी को दो सीटों पे देखा है ।लोकसभा में आज जिन्होंने आज सरकार बनाई है ।

मैंने यहां और तमाम और तमाम पार्टी को मैंने कांग्रेस को जिसने दिल्ली में 15 साल सरकार बनाई है उनको ज़ीरो सीटो पे देखा है ।तो चोट और बड़े दल मुझे नहीं पता क्या राजनैतिक परिभाषा होती है जनता का समर्थन तय करता है कि जनता आपको कहा देखना चाहती है हमने बुलंदशहर से चुनाव लड़ा तमाम राजनैतिक दल वहा थे

हमें लगभग 13500वोट मिले एक विधानसभा के लगभग औसत 10हजार का टारगेट ये समझे कि एक चोटी सी बात बता रहा हु आपको की कितनी बड़ी चाबी हमारे पास में है तो 403विधानसभा है तो ये पूरा अगर जोड़ेगे तो लगभग 43लाख के करीब वोट बैठेगा जो लोग 43लाख पे अभी है वो छोटा दल है दल है भी या नहीं है|

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विनिता यादव (न्यूज़ नशा): अच्छा गुणा – भाग अपने पहले उसको पूरा कैलकुलेट कर लिया

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा): ये समय तय करेगा हम लोग काम करेंगे और मैंने जिन लोगो पूर्ण बहुमत की सरकार में देखा है विपक्ष जो कांग्रेस पार्टी है वो पूरा केंद्र में सत्ता में रही यूपी मे दहाई में आ गई मुझे नहीं लगता बड़ा दल कैसा होता है अखिलेश यादव जी कि करीब 50सीटों के करीब है बीएसपी ने भी सरकार बनाई वो 18 से 19सीटों पर चली गई ये लोकतंत्र है ।

अप डाउन होता रहता है समय तय करेगा कि कौन बड़ा दल है और कौन छोटा दल है मैं सबसे छोटा हूं उम्र में राजनैतिक अनुभव भी उनके पास ज्यादा हो सकता है। लाशों पर राजनीति करना नहीं सीखा ना मैं इसको सीखना चाहता हूं मैं समता समानता मानवता की लड़ाई बाबा साहब अंबेडकर जो गुरु हुऐ जो तमाम चाहे वो रविदास जी महाराज हो या भगवान वाल्मीकि महाराज हो गुरु नानक देव हो संत कबीर हो तथागत बुध हो मैं उन्हीं के सिद्धांत पे काम कर था हूं की मानवता सबसे बड़ा धर्म है|  करना जरूरी है को आदर्श मानता हूं वह आज इस दुनिया में नहीं है लेकिन वो जो लिख कर गए हैं उसमें काफी कुछ सीखने को मिलते हैं।

विनिता यादव (न्यूज़ नशा): आप मीडिया से ख़ासकर टीवी पर ग़ुस्सा करने लगते हैं क्यूँ ?

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा): अपना अपना देखने का नज़रिया है हक की लड़ाई अगर किसी गुस्सैल स्वभाव लगता है किसी को लगता है कि उनके सवाल पर मैं यह पूछ ले रहा हूं की आपको भी जवाब देना पड़ सकता है तो उनको जो है आरामदायक स्थिति नजर आया आ जाती है तो मुझे इससे फरक नहीं पड़ता हां मुझे इंटरव्यू में यह पसंद नहीं कि मुझसे कोई पूछे कि आपका बचपन कैसा था

यह क्या था या आप स्कूल के समय में कैसे थे हम आज में जी रहे हैं हमें आज काम करना है भविष्य के बारे में पूछे और पिछला काम पूछे और मेरी देश के लिए क्या चाहत है उसे यह जानना चाहते हैं यह अच्छा सवाल है

आप मुझसे पूछेंगे कि आप पहले क्या करते थे और क्या किया जो मैंने किया वह पता है और मैंने कई दफा बताया है ऐसा कुछ नहीं है जब कोई मीडिया का व्यक्ति मेरे स्वाभिमान के साथ छेड़छाड़ करता है तो मुझे उनको बताना पड़ता है कि उनकी एक सीमा है

जिन लोगों को मैंने अब तक डाटा है उनको समझाया है उनके इंटरव्यू को शुरुआत से अगर सुनेंगे तो आपको पता चल जाएगा अगर इंटरव्यू की शुरुआत में मुझे कोई सियासी गिद्ध तो मुझे पता लग जाता है कि यह पत्रकार नहीं बल्कि चाटुकार है यह सत्ता के लोग है जो अघोषित प्रवक्ता है राजनीतिक दलों के जो पिछले दरवाजे से सत्ताधारी तथा तमाम पार्टियों के लिए काम कर रहे हैं

तो मुझे बताना पड़ता है तो क्या जवाब होता है अगर विपक्ष का आवाज उठाना और अपने हक की लड़ाई लड़ना अगर गिद्ध हो जाना है तो वह पत्रकार जो बैठकर दलाली करते उन्हें मैं पत्रकार नहीं मानता

पत्रकारिता यह होती है कि उनकी आवाज उठाएं जिनकी आवाज कोई नहीं उठा रहा है या उनके हक की बात करें जिनको उनका हक नहीं मिल रहा है और वह सत्ता से सवाल करें अगर आज के पत्रकार विपक्ष से सवाल करते हैं

तो सत्ता के लोगों को सुरक्षा देने का काम करते हैं सत्ता के लोगों की चाटुकारिता करते हैं यह लोकतंत्र का बहुत ही बड़ा मजाक है लोकतंत्र का चौथा स्तंभ जो है वह गुलामी जैसी तस्वीर पेश करता है तो मेरे जैसे ईमानदार लोग जो मीडिया की परवाह नहीं करते वह देते हैं|

विनिता यादव (न्यूज़ नशा): मुझे लगता है काफी लोग ने आपकी बात सामने रखी है ऐसा नहीं है

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा): अच्छा है जिन्होंने रखी है मैं महिलाओं की सम्मान करता हूं और मैं कभी अपने तरफ से किसी का अपमान नहीं करना चाहता हूं और मैं जानता हूं कोई छोटा बड़ा उम्र में कद में या किसी तरह से आपकी पद के वजह से सम्मान रखते हैं

यह हमारी जिम्मेदारी है आप अगर सम्मान दोगे तभी आपको सम्मान मिलेगा लेकिन जब कोई आप आदमी अपना हद भूल जाता है तो उसको बताना पड़ता है बाकी मेरा किसी से व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है और मैं व्यक्तिगत लड़ाई रखना भी नहीं चाहता हम तो मानवता की भलाई की बात करते हैं

मैं तो कहता हूं सबका मंगल हो इसमें ना तो कोई जाति छुट्टी है ना कोई धर्म ना कोई विपक्ष का व्यक्ति छूटता है यह तो हमारी प्रोग्रेसिव सोच रखनी चाहिए कि सबका मंगल हो सब लोग अच्छे हो जो जो गलत नीति को अपनाए हुए हो वह भी सुधर जाए उनको सद्बुद्धि मिले तथागत बुद्ध का आशीर्वाद मिल है |

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विनिता यादव (न्यूज़ नशा)- मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और जो पूर्व मुख्यमंत्री हैं अखिलेश यादव उन दोनों में आपकी नजर में कौन बेहतर है?

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा) : दोनों ने कुछ अच्छा हमारे लिए नहीं किया है ना तो मुझे मैं खुद भी बेरोजगार हूं दोनों सरकारों में ना मुझे ना मेरे लोगों को रोजगार मिला तो मैं किसी को नंबर देने के लिए यहां नहीं बैठा मगर जो अच्छा करेगा उसकी प्रशंसा करनी चाहिए

विनिता यादव (न्यूज़ नशा):  अगर दोनों में तुलना करें तो कौन सी सरकार आपको अच्छी लगती है

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा): बहुत सारी सरकारें रही है तो मुझे ऐसा लगता है कि यह सवाल जो है हां एक बहुत बड़ा नुकसान किया है अखिलेश जी ने जब उन्होंने डिमोशन किया बहुत सारे एसआई इंस्पेक्टर एक कॉन्स्टेबल बना या जब एक्स ई एन जब जे ई यह डिमोशन कहीं पूरे देश में नहीं हुआ उत्तर प्रदेश से शुरुआत हुई वह बहुत दुखद था और का बयान पढ़ा राजनीति में कोई किसी का अस्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता तो आने वाले कल में क्या होगा यह भविष्य के गर्भ में है मगर हमारी अपेक्षा यही रहेगी कि उत्तर प्रदेश को एक बेहतर सरकार दें जो जनता के हित में हो गोली की भाषा नहीं सच में जनता से संवाद हो|

विनिता यादव (न्यूज़ नशा): उप चुनाव  में मायावती जी से भी गबंधन किया था यानी आने वाले वक्त में कुछ भी हो सकता है?

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा):  एक अच्छा अवसर था भारतीय जनता पार्टी को उत्तर प्रदेश में रोकने का मेरी ही सबसे ज्यादा डिमांड थी कि होना चाहिए वह सिरे पर क्यों नहीं चल पाया मैं उसके बारे में बहुत-बहुत नहीं कहना चाहता।

विनिता यादव (न्यूज़ नशा):  आप ने वाराणसी से अपना नामांकन वापस लिया था

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा): भाजपा को रोकने के लिए लिया था और एक अपील भी की थी उस वक्त हम एक सामाजिक आंदोलन चलाते थे मैं चाहता था कि यह दोनों दल मिलकर भाजपा को रोकने का काम करें मगर फिर बाद में गठबंधन टूटा और बाद में कई बातें चली इसमें अखिलेश जी की ज्यादा गलती नहीं थी मै मानता हूं|

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विनिता यादव (न्यूज़ नशा):  तो मायावती जी की गलती थी?

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा):  बिल्कुल गलती है और यह सबको पता है लेकिन अगर आप मुझसे आप योगी जी नंबर देने के मूड में हूं तो जनता उन्हें नंबर देगी आने वाला कल बताएगा अखिलेश जी ने जो किया है उनको भी जनता नंबर देगी जो उन्होंने किया है मेरे नंबर देने से कुछ नहीं होने वाला जनता जो नंबर देगी उससे सरकार बनेगी और जनता जो नंबर देगी उससे सरकार बनेगी जिसे नंबर देगी उसकी सरकार बनेगी और मुख्यमंत्री बनेगा हम लोग मेहनत कर रहे हैं और बीजेपी को रोकने का काम करेंगे।

विनिता यादव (न्यूज़ नशा) : बात है अब अगर केंद्र की बात करूं तो जाहिर है वहां पर राहुल गांधी के चेहरे को देखा जा रहा है कि कांग्रेस की तरफ से आगे आए प्रधानमंत्री के तौर पर लेकिन क्या आपको लगता है कि जिस तरह से अभी तस्वीर चल रही है क्या उसमें राहुल गांधी अपने आपको फिट बैठा पाएंगे या कभी भविष्य में?

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा): देखिए मैं कोई राहुल गांधी का रिश्तेदार नहीं हूं या मैं राहुल गांधी की पार्टी से नहीं हो मुझे क्या फर्क पड़ता है एक नागरिक होने के तौर पर मैं यह मानता कि उनसे बेहतर विकल्प हो सकता है जनता मुझे मौका दें तो मैं राहुल गांधी से बेहतर विकल्प हो सकता हूं|

विनिता यादव (न्यूज़ नशा) : तो आपकी प्रधानमंत्री बनने की ख्वाहिश है?

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा): गरीब आदमी बहुत सारे सपने होते हैं और वो सपने पूरे करने के लिए वो बहुत संघर्ष करता है । मै आपसे इस लिए ये बात कह रहा हूं मुझे कोई अधिकार नहीं है टिप्पणी करने का वो अभी भी अच्छे नेता है ।

वह भविष्य में कैसे नेता होंगे वो उनका काम साबित करेगा जैसा मैंने कहा बीजेपी सबसे बड़ा फायदा जो ले रही है वह यह सच है कि मोदी जी के विपक्ष में राहुल गांधी को दिखाती है और कहते हैं कि यह आदमी इनके मुकाबले प्रधानमंत्री नहीं हो सकता बल्कि मोदी जी में इतनी खूबियां नहीं है जिस दिन वहां कोई दूसरा चेहरा होगा मुझे लगता है कि फिर जवाब देना देश की मीडिया को भारी होगा अभी वह राहुल गांधी जी का फायदा उठा रही जिसके लिए मुझे खेद है|

विनिता यादव (न्यूज़ नशा), अगर यह मौका आपको मिलता है तो जितने बेहतर तरीके से स्थितियां है उससे ज्यादा बेहतर हो सकती है ???

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा) : बिल्कुल बेहतर होंगी जब आपके पास अच्छी नीयत और नीति होगी तो जब आप देश को लूटने का प्रयास नहीं कर रहे होंगे और उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने प्रयास नहीं कर रहे होंगे और पूंजीपतियों के इशारे पर 150 लोगों पर आप चुप नहीं भी हो रहे है जब आप देश की जनता के बारे में सोच रहे हैं तो देश आगे बढ़ता है देखिए दो चीजें मैं आपसे कहना चाहूंगा पूजी पतियों की बात करें तो मुझे पूरी पतियों से कोई दिक्कत नहीं है

मगर पूंजीपति जो है अपना बिजनेस छोड़कर राजनीति में हिस्सेदारी करने लगते हैं तो राजनीति उनके हिसाब से चलने लगती है यह व्यापार नहीं है पहली बात तो समझना पड़ेगा कि राजनीति है क्या एक माध्यम है

जो आम जनता के लिए योजनाएं जो उनके हित उनको बनाने का और उन तक पहुंचाने का जिस तरह उनका विकास हो और पूरे देश का विकास हो आज विदेश नीति क्या है चीन जो है वह सिक्किम में 5 किलोमीटर तक अंदर आ गया है और घर बना लिए हैं पक्के 20,20 जवान शहीद हो जाते हैं एक के बदले 10 लाने वाले प्रधानमंत्री चुप क्यों हो जाते हैं

मुझे उनसे कोई मतलब नहीं क्योंकि मुझे उनसे उम्मीद नहीं वह मेरे भी प्रधानमंत्री हैं और इस देश के भी मगर रोज सबसे कमजोर प्रधानमंत्री कहने में मुझे कोई परहेज नहीं होता तो मुझे लगता देश इतना पीछे नहीं जाता रही बात तमाम चीजों की तो जनता का आक्रोश आपको यह बता देगा कि वह कि वह प्रधानमंत्री से कितना खुश है|

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विनिता यादव (न्यूज़ नशा),माइनॉरिटी बात करते हैं और दलित समाज की आप बात करते हैं तो क्या पहले से ही आपने प्लान किया था दोनों समीकरण मेरे लिए बेहतर हो सकते राजनीति के लिए ?

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा) मैंने कुछ भी पहले से योजना नहीं बना रखी सच तो ये है कि मैं राजनीति करना ही नहीं चाहता मैं मजबूर होकर राजनीति कबहु जब हमारे लोगों पर जो सामाजिक आंदोलन का काम कर रहे हैं क्योंकि मैं काशीराम साहब को नेता मानता हूं उन्होंने कहा था राजनीति चले आना चले मगर सामाजिक क्रांति रुकनी नहीं चाहिए सत्ता मिले या ना मिले मगर सामाजिक परिवर्तन की जो आंदोलन रुकनी नहीं चाहिए।

जिन उम्मीदों के साथ माननीय काशीराम साहब सामाजिक परिवर्तन एवं आर्थिक कर्पूरी ठाकुर का भी सपना था देवी प्रसाद का राम मनोहर लोहिया जी का भी सपना था तमाम बुद्धिजीवी ललई यादव हो या गुरु नारायण स्वामी हो या संत गाडगे जी महाराज तमाम चिंतक छत्रपति शाहूजी महाराज जो सपना था वह अधूरा है उन्हीं सपनों को पूरा करने के लिए मैं काम कर रहा हूं वह मानवता के लिए है

किसी जाति धर्म लेकिन मुझे लगता है जिन लोगों के पास और राजनीतिक दल है उनके खुद के राजनीतिक दल है उन्हें मेरे जैसे और मेरे राजनीतिक पार्टी जैसे लोगों की जरूरत नहीं है मैं किसी के चरणों में पढ़ कर राजनीति करने नहीं आया हूं मैं वोट का ताकत समझता हूं जिन को नहीं मिला मैं उनके लिए हूं मैंने कभी शेड्यूल कास्ट माइनॉरिटी की बात नहीं की मैंने बैकवर्ड की भी बात की क्योंकि बाबा साहब ज्यादा बैकवर्ड के पक्ष में थे

चाहते थे कि जो बैकवर्ड की स्थिति है उसमें चेंजर जाएं काशीराम साहब ने भी मंडल कमीशन के लिए बोट क्लब पर 45दिन धरना दियाबहुत सारे लोग रोज गिरफ्तारी आते थे तो मैं शेड्यूल कास्ट बैकवर्ड माइनॉरिटी शेड्यूल ट्राइब जो वंचित वर्ग है उनके अधिकार की लड़ाई लड़ रहा हूं और मैं प्रयास करूंगा कि अपने जो बैकवर्ड के लोग है अति पिछड़ा पिछड़ा उनको मैं इकट्ठा करूं और जो शेड्यूल कास्ट माइनॉरिटी के लोग हैं

उनकी आबादी के हिसाब से हक दिलाने का काम करेंगे और नेता तैयार करेंगे और उनके हित और मुद्दों के पर चर्चा करेंगे फिर काम करेंगे जिन को नहीं मिला है उनको देखकर एक अच्छा समाज बनाएंगे और अगर एक अच्छा समाज बनेगा तभी एक अच्छा देश बनेगा और प्रदेश बनेगा देखिए अगर शरीर का कोई एक हिस्सा कमजोर हो जाए तो शरीर ताकतवर नहीं हो सकता अगर देश में माइनॉरिटी या बैकवर्ड लोग या शेड्यूल कास्ट शेड्यूल ट्राइब की स्थिति अगर नहीं अच्छी होती है

तो देश कभी भी विकासशील नहीं होगा तो यह सब चीजें तब तक जो है जमुला बनी रहेंगी जब तक इन पर काम नहीं होगा प्रधानमंत्री कहते हैं दलितों को ना मारो मुझे मार लो इस तरह के भाषण देने से काम नहीं चलता काम करना पड़ता है

जितना अत्याचार बीजेपी की गवर्नमेंट में उत्तर प्रदेश में है उतना अखिलेश जी की सरकार में भी नहीं हुआ खूब जो भी बोलता उस पर एनएसए लगा दिया जाता या यूएपीए लगा दिया जाता तमाम तरह के एक्ट लगा दिया जाता  है |

विनिता यादव (न्यूज़ नशा): आपकी शुरुआत NSA से हुई थी…

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा):  जी स्वागत है भारतीय जनता पार्टी के लोगों ने मुझे इतना मजबूत बना दिया कि लोग जेलों से डरते हैं कुंदेलू का आदी हो चुका हूं अब मैं कभी जेल से नहीं डरता हूं

विनिता यादव (न्यूज़ नशा) ,मुझे लगता है हर बार गिरफ्तारी से आप के समर्थक बढ़ जाते हैं ?

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा):  मैं तो यह चाहता हूं कि सरकार तानाशाही दिखाएं जो लोग सोए हैं वह जाग जाएं जैसे किसान आंदोलन में उन्होंने बर्बरता का प्रयोग किया और पूरे एक समाज को अपमानित करने का प्रयास किया मगर उनका समाज जागा मैं चौधरी राकेश टिकैत की बात कर रहा हूं मैं चाहता हूं कि यह मुझे खूब पीटा और खूब उत्पीड़न करें खूब सताए जिससे मेरे सोए हुए लोग जगे या इनके के दलों में जो थोड़े थोड़े बैठे हैं वह लोग जाग जाए और पता लगे कि जब यह मेरी हालत यह कर सकते हैं |

तो तुम्हारे समाज से कितना प्यार करते हैं जिस दिन हमारा समाज जाग जाएगा इस देश का बहुजन समाज जाग जाएगा तो इनकी राजनैतिक दुकानें बंद हो जाएंगे तो मैं तो तैयार हूं उसके लिए मैं भगत सिंह को भी आदर्श मानता हूं अगर मेरी शहादत से या मेरे ऊपर हमले करने से या मुझे सताने से हमारे लोग जागे तो मैं उसके लिए तैयार हूं मैं अपने मुल्क से बहुत प्यार करता हूं और डॉक्टर अंबेडकर कहते थे हमारा है और इसे हम कमजोर नहीं होने देंगे इसलिए क्योंकि अयोग्य लोग शासन कर रहे हैं और हम इसलिए आए हैं कि योग्य राजनीति में आएं और सबको सबका अधिकार मिले और जो गलत तमाम तरीके की राजनीति हो रही है |

व्यापारिक राजनीति यह बंद हो जानी चाहिए क्योंकि चाइना और इंडिया एक समय पर आजाद हुआ आज चाइना की अर्थव्यवस्था देखिए और चाइना की मजबूती देखिए और उनकी तमाम तरह की ताकतों को देखिए और हमारे मुल्क को देखिए और जाति और धर्म की राजनीति की वजह से आज भारत को देखिए कहां है दुनिया में कहां है कभी सोने की चिड़िया हुआ करता था आज हमें देश चलाने के लिए कर्ज लेने पड़ रहे हैं । देश के सरकारों को जो उपकरण है उन्हें बेचना पड़ रहा है और वही चाइना दूसरे देशों को लोन दे रहा है तो यह नीयत और नीति नहीं थी इस वजह से यह पीछे है और जहां नियत और नीति है वह आगे हैं|

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विनिता यादव (न्यूज़ नशा):  आप को बातों से लगता है आप को भीम आर्मी की जगह आर्मी ज्वाइन करनी चाहिए थी?

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा):  मां को डर लगता था कि आप मी में जाते लोग मर जाते हैं उनकी जान जाती है उन्होंने मुझे भेजा नहीं इसलिए मैंने भी मम्मी बनाई क्योंकि मैं देश हित के लिए कुछ करना चाहता हूं|

विनिता यादव (न्यूज़ नशा):  यहां आपको खतरा नहीं लगता?

चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा): नहीं सर मैंने सिर्फ मां को समझाया कि जान एक दिन जानी है के जवानों के नाम पर राजनीति होती है मेरे परिवार में कई आर्मी में लोग है उनको शहादत हो जाती है मगर उन्हें शहीद का दर्जा नहीं मिलता अगर किसी तरह से उन्हें शहीद का दर्जा मिल जाए तो वह तमाम सुविधाएं उसके लिए उन्हें तमाम तरह की रिश्वत और तमाम तरह की परेशानियां समना करना पड़ता है|

उनके चप्पल गिष जाते हैं वो सुविधा प्राप्त करने के लिए तो हम यहां देश में तमाम लोग राजनीति का शिकार हो रहे हैं सेना के जवान 2 दिन याद किए जाते हैं 2 दिन कैंडल मार्च होता है बाकी वह कभी उस फ्रेम में आए ही नहीं तो मुझे इन तमाम तरह की राजनीति को बदलने का काम करना है मैं हर एक व्यक्ति के जीवन की कीमत को समझता हूं मानव मूल्य को समझता हूं और जिसने कुछ खोया उसे पता होता है तो मैंने बहुत कुछ खोया है मैंने अपने जीवन का अमूल्य समय खोया है|

जो सरकार के तानाशाही और इनकी षड्यंत्र सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के वजह से जेलों में बिताया लगभग दो-तीन साल पिछले 3 साल के अंदर कभी मुझे जामा मस्जिद से गिरफ्तार किया गया और पुलिस कहती है यह वहां भड़काऊ भाषण दे रहे थे तो कोर्ट पूछता है बताइए क्या सबूत है तो प्रशासन कहता है रिकॉर्ड नहीं है हमारे पास तो सत्ता का दुरुपयोग करके यह बहुत सारे निर्दोष लोगों को जेल में बंद किया गया है और किया जा रहा है और उनकी आवाज को दबाया जा रहा है यह नहीं होना चाहिए हमें सब को सुनना चाहिए विरोध करना हमारा अधिकार है और हमें तब तक करना चाहिए जब तक सरकार सही काम नहीं करती है|

अगर सत्ता में भी सरकार है तो उसे जनहित में काम करने पड़ेंगे और हम इन्हें भागने नहीं देंगे वापस पकड़ के लाएंगे और आगे आने वाले कल में हम इनके गिरेबान पकड़ेंगे क्योंकि यह जनता के मालिक नहीं है जनता के नौकर हैं और जनता के द्वारा बनाए गए हैं और जनता के लिए बने हैं यह जनता के काम करेंगे अपने लिए नहीं तो मुझे गर्व है भारतीय होने पर मुझे भारत को और मजबूत देखना चाहता हूं और इसके लिए मैं काम कर रहा हूं धन्यवाद।

 

विनिता यादव (न्यूज़ नशा):  तो आक्रोश है आवाज़ है एक युवा नेता जिसे सत्ता विरासत में नहीं मिली है, लेकिन देखना यह होगा कि यह युवा नेता क्या वाकई में अपने समाज में और अपने देश में एक सशक्त नेता के तौर पर अपनी जमीन तलाश पाएंगे सवालों के जवाब तो आपको मिले हैं लेकिन बाकी तो वक्त पर छोड़ना पड़ेगा|

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