20 साल बाद फिर जिंदा हुआ ‘Wife Swapping’ का नेटवर्क, दिल्ली में किताब के विमोचन ने खोली ग्रामीण भारत की छिपी सच्चाई

करीब दो दशक पहले की गई ग्राउंड रिपोर्टिंग अब किताब की शक्ल में सामने आई है। वरिष्ठ पत्रकार विनिता यादव की किताब ने ग्रामीण भारत की छिपी सामाजिक सच्चाई उजागर की है। दिल्ली वर्ल्ड बुक फेयर में पूर्व CJI केजी बालकृष्णन ने किया पुस्तक का विमोचन।

नई दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में वरिष्ठ पत्रकार विनिता यादव की खोजी किताब “Wife Swapping in Rural India” का विमोचन किया गया। इस पुस्तक का औपचारिक विमोचन देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस के.जी. बालकृष्णन ने किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विनिता यादव ने बताया कि उन्होंने इस संवेदनशील मुद्दे पर पहली बार लगभग 20 साल पहले फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान काम किया था। उस समय यह प्रथा सीमित इलाकों तक ही दिखाई देती थी, लेकिन आज यह ज्यादा संगठित, तकनीकी रूप से मजबूत और डिजिटल नेटवर्क का रूप ले चुकी है।

सोशल मीडिया से मजबूत हुआ नेटवर्क

लेखिका के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में पत्नी अदला-बदली जैसी गतिविधियों से जुड़े लोग आज भी सक्रिय हैं। ये लोग WhatsApp ग्रुप्स, Facebook और निजी डिजिटल नेटवर्क्स के जरिए एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। तकनीक ने जहां इस नेटवर्क को मजबूत किया है, वहीं समाज की चुप्पी ने इसे पनपने का मौका दिया है।

सनसनी नहीं, वर्षों की खोजी पत्रकारिता

विनिता यादव ने साफ किया कि यह किताब किसी तरह की सनसनी फैलाने की कोशिश नहीं है, बल्कि लंबे समय तक की गई खोजी पत्रकारिता, जमीनी अनुभव और वास्तविक तथ्यों पर आधारित है। किताब ग्रामीण भारत की पारंपरिक छवि और उसके भीतर चल रही छिपी सामाजिक सच्चाइयों के बीच के विरोधाभास को सामने लाती है।

जस्टिस बालकृष्णन ने क्या कहा

किताब की भूमिका लिखने वाले पूर्व CJI जस्टिस के.जी. बालकृष्णन ने कहा कि यह पुस्तक समाज को उन सच्चाइयों से रूबरू कराती है, जिन पर अक्सर पर्दा डाल दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि ऐसी किताबें केवल पढ़ने के लिए नहीं होतीं, बल्कि समझने और सवाल उठाने के लिए जरूरी होती हैं।

बड़ी संख्या में पहुंचे पत्रकार और पाठक

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकार, पाठक और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान यह संदेश साफ तौर पर उभरा कि ग्रामीण भारत को केवल आदर्श और पवित्र मानने की धारणा के पीछे कई अनकही और दबाई गई सामाजिक सच्चाइयाँ छिपी हैं। “Wife Swapping in Rural India” सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि उस सामाजिक चुप्पी के खिलाफ एक दस्तावेज है, जिसे आज भी स्वीकार करना समाज के लिए असहज माना जाता है।

Related Articles

Back to top button