सितारे आसमान पर मुद्दे जमीन पर

0
100

स्टार कास्ट फिल्मी शूटिंग जैसी चुनावी फिज़ां

कॉरपोरेट मैनेंजमेंट के आसमान पर चमकते सियासी सितारे

जमीन पर दम तोड़ते ज़मीनी चुनावी मुद्दे

लखनऊ और रायबरेली के दरम्यान पिछड़ा मोहनलालगंज

” सोनिया गांधी की रायबरेली लोकसभा सीट है और राजनाथ सिंह लखनऊ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। लखनऊ और रायबरेली लोकसभा सीटों के दरम्यान मोहनलालगंज की रिजर्व सीट है। राष्ट्रीय मीडिया की नजर में लखनऊ और रायबरेली वीवीआईपी सीटें हैं इसलिए इसपर ज्यादा तवज्जो है। मोहनलाल गंज को कोई वीवीआईपी उम्मीदवार नसीब नहीं हुआ इसलिए ये पिछड़ा क्षेत्र चुनावी चर्चा में भी पिछड़ा है।’

वीवीआईपी सीटों और अति विशिष्ट उम्मीदवारों का क्या अर्थ हैं। लोकतंत्र के शब्दकोश में तो इसका कोई अर्थ नहीं।देश के चंद बड़े नेताओं और उनकी उम्मीदवारी पर ही पूरी तवज्जो क्यों ? बाकी सब सीटें .. हज़ारों उम्मीदवार और करोड़ों जनता क्या जानवर हैं !

 

भारत की सवा सौ करोड़ जनता और उनकी नुमांदगी के कई हज़ार दावेदार लगता है चुनाव से पहले ही हार गये हैं। करोड़ों आम इंसानों की चाहत और ताकत के लोकतांत्रिक उत्सव पर शो बिजनेस हॉवी हो गया है। चुनावी शोर में सन्नाटा हैं। आम जनता की जरुरतों की फिक्र सन्नाटे मे है। अहम मुद्दों पर ख़ामोशी है। धन बल और बाहुलब में कमज़ोर नॉन ब्रांड हज़ारों प्रत्याशियों को राष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया नजरअंदाज कर रही है।

देश की जनता की नुमाइंदगी करने वाले सबसे बड़े सदन लोकसभा की 543 सीटों पर हजारों प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन धनबल, ग्लैमर वाले चंद कद्दावर उम्मीदवारों की हलचलों में पूरा चुनावी माहौल सिमट रहा है।

पुराने ज़माने में शो को तमाशा कहा जाता था। नये ज़माने के शो वाक़ई तमाशा हो गये हैं। चुनावी माहौल कुछ चंद बड़े नेताओं के किस्म-किस्म के शो में सिमट गया है।
कभी सादे तो कभी मसालेदार इंटरव्यू के शो.. वीवीआईपी नेताओं के दिखावटी धार्मिक अनुष्ठानों के ढोंग का शो..बड़े राजनेताओं के रोड शो……
ये तमाम शो हर किसी के बेडरूम में भी घुस आये हैं। चर्चित राजनेताओं के प्रायोजित राजनीति टीवी शो के जरिए।

चंद बड़े नेताओं के रोड शो.. धार्मिक पाखंड के दिखावे, बदजुबानी के वाक युद्ध और उनपर टीवी शो में सिमटा लोकतंत्र का उत्सव तमाशा हो गया है। दरअसल चुनाव आम जनता की ताकत का शक्तिप्रदर्शन है। आम प्रत्याशियों को मौका देना भी चुनाव का सौंदर्य है।आवाज उठाना.. वादाखिलाफ सत्ता का तख्ता पलटना.. सत्ता का हिसाब मांगना.. सत्ता का हिसाब देना.. वादे करना.. एजेंडा बयान करना.. और सबको नाप तोड़ कर जनता द्वारा अपने नुमांइदों को चुनने को चुनाव कहते हैं।
किंतु लोकतंत्र के इन सिद्धांतों और मूल्यों के विपरीत टीवी चैनल्स की स्टार कास्ट शूटिंग तक सीमित हो गया है चुनावी माहौल। बेहतरीन प्रोडक्शन और मैनेजमेंट। विभिन्न लोकेशन पर भव्य सेट और स्टार कास्ट का बढ़िया अभिनय.. कॉमेटी, एक्शन,इमोशन और भड़काऊ संवाद। और फिर लाइट एक्शन कैमरा।
यही हाल देश के चुनावी उत्सव का है। अब हम बात शुरु करते हैं देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश से। यहां कुल अस्सी सीटों में पांच-सात ख़ास उम्मीदवारों की चर्चित लोकसभा सीटों का ही शोर है। बाक़ी लोकसभा सीटों पर चर्चित चेहरे नहीं लड़ रहे हैं तो माहौल बनाने वाले टीवी न्यूज चैनल इनको चुनावी माहौल और चर्चाओं से दूर रखे हैं।
गुमनामी के अंधेरों में तमाम लोकसभा क्षेत्रों में जैसे इंसान नहीं जानवर रहते हैं।
उत्तर प्रदेश का वाराणसी चुनाव का केंद्र बना है। क्योंकि यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चुनाव लड़ रहे हैं। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भाजपा के टॉप थ्री पोजीशन के दिग्गज नेता और गृहमंत्री राजनाथ सिंह चुनाव लड़ रहे हैं इसलिए ये लोकसभा सीट खास है और चर्चा मे है। इसके नजदीक रायबरेली लोकसभा सीट कांग्रेस की सोनिया गांधी उम्मीदवार हैं इसलिए इस सीट पर ज्यादा तवज्जो है। लखनऊ और रायबरेली के बीच मोहनलाल गंज लोकसभा सीट जिक्र-ए-इलेक्शन से दूर है। हालांकि यहां की चर्चा भी किसी से कम नहीं होना चाहिए। पिछड़ा/दलित बाहुल मोहनलालगंज लोकसभा क्षेत्र खुद भी खूब पिछड़ा है। एक गैंग रेप से ये क्षेत्र कांप गया था। यहां खूब रेप होते है। यहां बेटी की आबरू बचाना आसान नहीं और बेटी को पढ़ा पाना भी कठिन है। रोजगार की परेशानी है।बिजली,पानी, सड़क/रोड सबकी दुश्वारियां हैं। काम नहीं है इसलिए जिन्दगी किस काम की! यहां के परेशान लोगों में किसी शख्स की ऐसी धारणा से रुह कांप गयी। काम पाने और पेट भरने की रोटी के लिए यहां कुछ लोग पटाखे बनाने का काम करके जान पर खेलते हैं। यहां के कुछ क्षेत्रों में बिना मानकों और लाइसेंस के पटाखे बनाने का काम होता है। जिस दौरान तमाम लोग झुलस चुके हैं।
यहां ऐसी तमाम बड़ी समस्याएं हैं लेकिन इस मोहनलालगंज क्षेत्र के प्रत्याशियों का सियासी क़द छोटा है। यहां भाजपा के निवर्तमान सांसद कौशल किशोर और सपा-बसपा गठबंधन के बसपा प्रत्याशी सी.एल.वर्मा का मुकाबला है। कांगेस ने इस सीट से आर. के. चौधरी को उतारा है। विकास, रोजगार,स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा में पिछड़े मोहनलालगंज लोकसभा क्षेत्र की जनता में गुस्सा और नाराज़गी साफ नजर आ रही है। पिछले लोकसभा चुनाव की मोदी लहर में जीते कौशल किशोर एंटी इनकम्बेंसी का शिकार हो सकते है। ऐसे में सियासत के नौसिखया और साफ-सुथरी छवि के सपा-बसपा गठबंधन के बसपा उम्मीदवार सी.एल.वर्मा यहां जनता के रुझानों में रेस में आगे दिखाई पड़ रहे हैं।

– नवेद शिकोह

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here