एक गरीब आदिवासी महिला की इस हिम्मत को देखेंगे तो वाकई सैल्यूट करेंगे!

बूढ़ी सास और छोटे-छोटे चार बच्चों का पेट भरने के लिए एक आदिवासी महिला हिम्मत नही हारी बल्कि और मजबूत इरादों से खेत मे काम करना शुरू किया। कारीबाई ने बताया कि उनकी बड़ी बेटी कृष्णा स्कूल नही जाती है। घर और खेत के काम मे उनकी मदद करती है। मध्य प्रदेश के देवास जिले के कन्नौद क्षेत्र के कुसमानिया-दीपगांव मार्ग स्थित ग्राम भिलाई के पठार पर खेती का नजारा इस मार्ग से निकलने वाले सभी राहगीर देखकर निकल जाते है। भिलाई के पठार पर आदिवासी एवं अन्य परिवार के करीब 25 घर होंगे। इन्ही के गांव में कारीबाई पति हरदास बारेला भी रहती है। जो अपनी 4 एकड़ कृषि भूमि में मक्का एवं मूगफली उगाकर परिवार का पालन पोषण कर रही है।

कारीबाई ने बताया कि 3 साल पहले एक सड़क हादसे में उनके पति हरदास और बेटे संतोष की मौत हो गई। तब से ये अपना परिवार पालने के लिए खेती और मजदूरी कर रही है।

कृषि को लाभ का धंधा बनाने के लिए बात पर सरकार द्वारा जोर दिया जाता है, और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए कृषि उपकरणों एवं खाद-बीज भी अनुदान पर दिया जाता है | लेकिन जमीनी स्तर पर ये योजनाएं कितनी पात्र हितग्राहियो तक पहुंचती है ये बताना मुश्किल है। सरकार की योजना का लाभ मिले या न मिले। फिर भी किसान को अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए खेती तो करनी पड़ती है।

ऐसा ही एक मामला कन्नौद तहसील के ग्राम भिलाई में देखने को मिला। जहां अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए माँ-बेटी मिलकर डोरे चला रही है। अपनी फसल में उगे अनावश्यक घास के लिए बेटी बनी बैल और माँ डोरे को संभाल रही है।
इस संबंध में पंचायत सचिव राजेश बागवान ने बताया कि कारीबाई को पंचायत स्तर से पीएम आवास, शौचालय, कल्याणी पेंशन और बीपीएल कार्ड का लाभ दिया है। पात्रता अनुसार जो भी योजनाएं आएगी उनका लाभ भी प्राथमिकता से दिया जाएगा।

इस संबंध में कृषि विभाग के अनुविभागीय अधिकारी आरके वर्मा से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि अब तक मुझे यह मामला जानकारी में नही था। अब कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से दिया जाएगा।

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