इसलिए ख़ुशमिजाज़ अखिलेश बन गये एलबर्ट पिंटो !!!!

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एक न्यूज चैनल के लाइव शो में जायज़ और सामान्य सवाल पर  एक महिला एंकर/पत्रकार को प्रधानमंत्री ने खूब फटकारा। कोई चर्चा नहीं हुई।
 समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को प्रेस कांफ्रेंस में एक कथित पत्रकार के बेतुके और प्रायोजित सवाल पर गुस्सा आ गया। ये बात चर्चा बनी। इस बात की गहराई और सच्चाई  जानने से पहले आइए इतिहास से बात को शुरु करें  –
पत्रकारिता और पत्रकारों का सम्मान करने की भावना अखिलेश यादव को विरासत में मिली है। समाजवादी पार्टी और पार्टी फाउंडर मुलायम सिंह यादव ने देश और दुनिया के राजनीतिक दलों को पत्रकारों की अहमियत के मायने बताये हैं। पत्रकार बिरादरी लोकतंत्र की चौकीदारी में अपनी ज़िन्दगी लगा देती है। इसलिए इन्हें इज्जत देना देश के लोकतंत्र को सम्मान देने जैसा है। कलमकारों को लेकर हमेशा मुलायम रहे मुलायम सिंह के ये उद्गार ही नहीं सुने हैं। नेता जी ने अपनी इस भावना को हमेशा अमली जामा भी पहनाया। पत्रकारों के अधिकारों को पूरा करने की कोशिश की। मीडिया की हर आलोचनात्मक रिपोर्ट का सिर आंखों पर स्वागत किया। सपा सरकार या पार्टी पर लिखी हर आलोचनातमक खबर से नेता जी ने सुधार की गुंजाइश को ढूंढा। आलोचकों का अहसान माना और उन्हें धन्यवाद दिया। समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह यादव के इन संस्कारों का झंडा पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव मजबूती से थामे हैं। मुलामय पुत्र समाजवाद के मायने जानते हैं। निष्पक्ष पत्रकारिता समाजवाद की गति है। शासनतंत्र की तानाशाही, पूंजीवाद का घमंड और सत्ता व धन बल के दुरूपयोग के खिलाफ आवाज पत्रकारिता का ख़ास मक़सद है। यही उद्देश्य समाजवाद के मूल्यों और सिद्धांतों का भी है। इसलिए एक कार्यकर्ता से लेकर सत्तानशीन समाजवादी ने पत्रकारिता और पत्रकारों की क़द्र की है। इन सच्चाइयों की दलीलों की लम्बी फेरिस्त में मुलायम सिंह की सरकारों से लेकर अखिलेश यादव सरकार के तमाम काल खंड हैं। पत्रकारों की तमाम जायज़ ज़रुरतों और समस्याओं के समाधान में  समाजवादी सरकारों ने जितना काम किया शायद ही किसी सरकार ने इतना काम किया हो।  ज़मीनी समाजवादी नेताओं और ज़मीनी ईमानदार पत्रकारों का चोली दामन का साथ रहा। आलोचनातमक खबरें लिखकर सुधार का शंखनाद करने वाले पत्रकारों को पिता-पुत्र मुलायम-अखिलेश खुद की सियासी सेहत का डाक्टर/फिटनेस ट्रेनर मानते हैं। अखबारों की आर्काइव बाई लाइन खबरों के सफे गवाह है। मुलायम-अखिलेश की खामियों को ज्यादा बयां करने वाले पत्रकारों को भी इन पिता-पुत्र जमीनी नेताओं ने उतना ही सम्मान दिया जितनी अन्य पत्रकारों को इज्जत दी गयी। सपा हुकुमतों में यूपी के पत्रकारों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं रखा गया। मुलायम के कार्यालय पर ग़ौर कीजिए तो पता चलता है कि सपा की हर सरकार में सरकार की कमियों को उजागर करने वाल गरीब/भूमिहीन/आवास हीन पत्रकारों को पहले सब्सिडी पर भूखंड और सरकारी आवास दिये गये। जो साधनहीन  अखबार सरकार की खामियों को उजागर करते थे उन अखबारों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक समय से पंहुचाने के लिए मुलायम सरकरों ने अखबारी छपाई की मशीन तक का सहयोग दिया। पिता मुलायम की इस भावना की विरासत को पुत्र अखिलेश ने आगे बढ़ाया। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने देश के हाईटेक पीजीआई में मान्यता प्राप्त पत्रकारों के मुफ्त इलाज का इंतज़ाम कर दिया। पांच साल में जितने भी पत्रकारों की मौत हुई करीब सब मृतक पत्रकारों के परिजनों को पच्चीस-पच्चीस लाख की आर्थिक सहायता दी….
नगेन्द्र ….

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