एमपीपीएससी में भील जाति को लेकर पूछे गए सवालों को लेकर दर्ज प्रकरण खारिज

इंदौर। मध्यप्रदेश में राज्य लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) द्वारा आयोजित राज्य सेवा परीक्षा में भील जाति को आपराधिक प्रवृत्ति का बताये जाने के मामले में एमपीपीएससी के अध्यक्ष सहित तीन पदाधिकारियों के खिलाफ कुछ माह पूर्व थाने में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। अब इस मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने प्रकरण को खारिज करने के आदेश दिये हैं।

राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार को मामले की जानकारी देते हुए बताया कि एमपीपीएससी द्वारा राज्य सेवा प्रारम्भिक परीक्षा-2019 का आयोजन इसी साल जनवरी के माह में किया गया था। परीक्षा में भील समुदाय से संबंधित एक गद्यांश दिया गया था, उस पर आधारित पांच प्रशन पूछे गए थे। इस मामले को लेकर जमकर विवाद हुआ था, जिसके बाद आयोग ने पांचों विवादित प्रश्नों को विलोपित कर दिया था। चौतरफा हंगामे के बाद सामाजिक संगठनों के विरोध के बीच कुछ लोगों की शिकायत पर पुलिस ने आयोग की अध्यक्ष डॉ भास्कर चौबे, तत्कालीन सचिव रेणु पंत समेत तीन पदाधिकारियों के विरुद्ध 15 जनवरी को प्रकरण दर्ज किया था। इस मामले में अध्यक्ष डॉ. भास्कर चौबे, तत्कालीन सचिव रेणु पंत व एक अन्य अधिकारी की ओर से हाईकोर्ट की इंदौर बैंच में याचिका दायर की गई थी। गुुरुवार को इस मामले की हाईकोर्ट में सुनवाई हुई और दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद न्यायाधीश एससी शर्मा ने अपना फैसला सुनाते हुए अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण थाना इंदौर उप पुलिस अधीक्षक के द्वारा इन तीनों आवेदकों के विरुद्ध अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज प्रकरण को खारिज करने के आदेश दिए।

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