Editorial : बेटियों ने परचम बना लिया आंचल, राजनीतिक अखाड़ा न बनाइये बेटियों के सम्मान को 

बेटियों ने आंचल को परचम बना लिया है । अब सरकार को सोचना है कि विनेश एक बेटी यह क्यों कह रही है कि बेटी पैदा ही नहीं चाहिए ! बेटियों के दर्द को समझिये प्लीज । इसे राजनीतिक अखाड़ा न बनाइये !

नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर महिला पहलवानों के साथ साथ पुरुष पहलवानों का धरना जारी है । मांग एक ही कि कुश्ती संघ के अध्यक्ष ब्रज भूषण शरण को पद से हटाया जाये क्योंकि इनके और इनके चहेते कोच के चलते बेटियों के सम्मान को और शील को खतरा है । यह आवाज उठाई विनेश फौगाट ने और सुर मिले देश भर से । सरकार है कि तीन दिन में जांच की बात पर अड़ी है । पहलवान हैं कि इस्तीफे न दिलवाया तो एफआईआर दर्ज करवाने की चेतावनी दे रहे हैं । विनेश का कहना है कि हम नहीं चाहतीं कि प्रमाण सार्वजनिक कर अपनी सहयोगियों को शर्मिंदा करें लेकिन हमारे पास पुख्ता प्रमाण हैं । इस सारे मामले पर हरियाणा में विपक्षी नेता सरकार की काफी आलोचना कर रहे हैं । नेता प्रतिपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सरकार की इस मामले में खामोशी ही आपत्तिजनक लग रही है । राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा इस मामले की जांच सीबीआई से करवाने की मांग कर रहे हैं तो जजपा के दिग्विजय सिंह भी पहलवानों के साथ खड़े होने की बात कह रहे हैं । आप पार्टी के अनुराग ढांडा भी पहलवानों को मदद की बात कह रहे हैं । सैलजा भी सरकार पर सवाल उठा रही हैं । अभय चौटाला भी आवाज उठाने वालों में शामिल हैं ।

अब इन सबके साथ के बावजूद यह निवेदन करना चाहता हूं कि बेटियों के सम्मान को राजनीतिक अखाड़ा न बनाइये । केंद्र सरकार व कुश्ती संघ भी अपने अपने बचाव की तरकीबों में जुट गये हैं । दोनों तरफ जम गया अखाड़ा ! सरकार ने न तो अब तक संदीप सिंह पर कोई कार्रवाई की है और न ही बृज भूषण शरण पर ! हां महिला खिलाड़ियों ने जरूर हिम्मत कर अपने आंचल को परचम बना कर फहरा दिया है

अब गीता व बबिता फौगाट भी पहलवानों के समर्थन में आई हैं । विनेश के परिजन भी दिल्ली पहुंच चुके हैं । द्रोणाचार्य अवॉर्डी महावीर फौगाट की मांग है कि पहलवानों के मनोबल को तोड़ने की निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए । यदि इतनी ही चिंता महिला कोच के मामले में भी की होती तो उसके मामले को सरकार फाइलों और जांच के नाम पर दबाने में सफल न होती । महिला कोच की ट्रांस्फर पंचकूला कर उसे मनाने की एक कोशिश मानी जा सकती है । वह भी तो एक महिला कोच थी । वह भी तो हरियाणा की बेटी थी । तब विनेश फौगाट कहां थी ? अपने अपने मामले पर ही केंद्रित न रहकर इसे बेटियों के सम्मान के साथ जोड़ने की जरूरत है ।

अकेली महिला कोच लड़ाई लड़ती रही अपने सम्मान की । सब तरफ खामोशी छाई रही । कोई खुलकर सामने नहीं आया । आज बहुत सी आवाजें उठ रही हैं चहुंओर से ! बहुत खुशी है लेकिन महिला कोच के मिन सम्मान की रक्षा के मुद्दे को भी इसके साथ जोड़िये !
शायर असरार उल हक मजाज का एक शेर है –

तेरे माथे पर ये आंचल बहुत ही खूब है लेकिन 
तू इस आंचल से परचम बना लेती तो अच्छा था !

-कमलेश भारतीय 

 

 

 

 

 

 

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