हुड्‌डा ने बुलाई विधायक दल की बैठक:22 सितंबर को होगी मीटिंग,

3 दिन चंडीगढ़ में ही रहेंगे पूर्व CM; पंजाब में सियासी उलटफेर के बीच अहम मानी जा रही बैठक

पड़ोसी राज्य पंजाब में बदले राजनीतिक घटनाक्रम के बाद हरियाणा कांग्रेस में हलचल तेज हो गई हैं। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्‌डा ने 22 सितंबर को दोपहर में चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास पर विधायकों को बुलाया है। हालांकि मीटिंग को लेकर ज्यादा जानकारी तो सामने नहीं आई हैं, लेकिन राजनीति चर्चा जरूर हैं कि इसमें पंजाब में हुए घटनाक्रम को लेकर भूपेन्द्र सिंह हुड्‌डा विधायकों के साथ चर्चा करेंगे। पूर्व CM हुड्‌डा तीन दिन तक चंडीगढ़ में ही रहेंगे।

दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्‌डा को सिसायत का मझा हुआ खिलाड़ी कहा जाता हैं। कुमारी सैलजा के प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद से ही हुड्‌डा समर्थक विधायक भी कई बार हाईकमान पर प्रदेशाध्यक्ष बदलने की मांग को लेकर दबाव बना चुके हैं। इन सबके बीच पंजाब में एक दिन पहले हुए राजनीतिक घटनाक्रम के बाद हुड्‌डा के सामने भी नई चुनौती खड़ी हो गई हैं। हुड्‌डा की तरह पंजाब में पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह राजनीति करते आए हैं। कैप्टन के खिलाफ हाईकमान के कड़े फैसले के बाद हरियाणा में इसका सीधा असर पड़ा हैं।

22 सितंबर को भूपेन्द्र सिंह हुड्‌डा के चंडीगढ़ के सेक्टर-7 स्थित सरकारी कोठी पर बुलाई गई विधायक दल की बैठक काफी अहम रहने वाली हैं। हालांकि बैठक को लेकर विधायकों को कोई एजेंडा नहीं भेजा गया हैं। कहा जा रहा है कि इस बैठक में तीन खेती कानूनों के विरोध में चल रहे किसानों के आंदोलन से लेकर प्रदेश के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी, लेकिन हकीकत यह है कि हाईकमान के फैसले के बाद बदले हालात के बीच इस पर मुख्य रूप से चर्चा होगी।

गुटबाजी का खामियाजा भुगत रही कांग्रेस
हरियाणा में पिछले 7 साल से कांग्रेस का संगठन खड़ा नहीं हो पाया हैं। इसके पीछे हरियाणा में आपसी गुटबाजी हावी होना रहा हैं। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर का पत्ता कटने के बाद भूपेन्द्र सिंह हुड्‌डा को कुछ राहत मिली थी, लेकिन हाई कमान ने कुमारी सैलजा को जब से प्रदेशाध्यक्ष बनाया है, तभी से हुड्‌डा व सैलजा की जोड़ी फिट नहीं बैठ पाई हैं। हुड्‌डा खुद की पसंद के किसी नेता को प्रदेशाध्यक्ष बनवा चाहते हैं। इसकी कोशिश पिछले कुछ माह में कई बार की गई। हुड्‌डा समर्थित विधायक हाई कमान के दरबार तक पहुंचे, लेकिन बात नहीं बनी।

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