बामयन में फिर तालिबान का कहर

राज जमाते ही बामियान में फिर तालिबान का कहर, अल्पसंख्यक नेता की मूर्ति तोड़ी; बुद्ध प्रतिमाओं को भी बम से उड़ाया था

अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी को लेकर जो डर था, वह अब सच होने लगा है। तालिबान ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है और अब उसकी हाल की एक हरकत से बामियान का वह कांड याद आ गया, जिसमें आतंकी संगठन ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा को बम से उड़ाकर तहस-नहस कर दिया था। तालिबान ने बामियान में मारे गए हजारा नेता अब्दुल अली मजारी की प्रतिमा को ध्वस्त कर दिया है। इस घटना से तालिबान ने अपने पिछले कार्यकाल के दौरान बामियान स्थित बुद्ध भगवान की मूर्तियों के विनाश की एक निष्ठुर याद की झलक दिखा दी है।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट सलीम जावेद ने ट्वीट किया कि …तो तालिबान ने बामियान में मारे गए हजारा नेता अब्दुल अली मजारी की प्रतिमा को उड़ा दिया है। पिछली बार तालिबानियों उन्हें मार डाला था, बामियान स्थित बुद्ध की विशाल मूर्तियों और सभी ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों को उड़ा दिया था। बता दें कि 20 साल पहले के अपने राज में तालिबान बर्बर सजाओं और क्रूर शासन के लिए कुख्यात है।

So Taliban have blown up slain #Hazara leader Abdul Ali Mazari’s statue in Bamiyan. Last time they executed him, blew up the giant statues of Buddha and all historical and archeological sites.

Too much of ‘general amnesty’. pic.twitter.com/iC4hUZFqnG

— Saleem Javed (@mSaleemJaved) August 17, 2021

गौरतलब है कि हजारा नेता अब्दुल अली मजारी एक हजारा नेता था, जिन्हें 1995 में तालिबान ने मार डाला था। तालिबान वर्षों से हजारा समुदाय पर बार-बार हमला करता रहा है। हजारा अल्पसंख्यक समूह है, जो मुख्य रूप से अफगानिस्तान के पहाड़ी मध्य क्षेत्र में केंद्रित है, जिसे हजराजत के नाम से जाना जाता है। हजारों को मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज खान और मंगोल सैनिकों के वंशज कहा जाता है।

दरअसल, बामियान के बुद्ध चौथी और पांचवीं शताब्दी में बनी बुद्ध की दो खडी मूर्तियां थीं, जो अफगानिस्तान के के बामियान में स्थित थी। साल 2002 में अफगानिस्तान के जिहादी संगठन तालिबान के नेता मुल्ला मोहम्मद उमर के कहने पर डाइनामाइट से उड़ा दिया गया था। ये मूर्तियां चीन और दक्षिण एशिया के बीच एक प्राचीन व्यापार मार्ग पर स्थित थीं. काबुल से करीब 200 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिम में बामियान घाटी एक बौद्ध केंद्र थी। छठी शताब्दी में कई बौद्ध संयासी इस घाटी में रहते थे। कहा जाता है कि बौद्ध संयासियों के साथ ही केंद्रीय अफगानिस्तान के पहाड़ी इलाकों में बौद्ध कला और संस्कृति आई। लाल रेतीले पत्थर की बड़ी बड़ी चट्टानों में रहने लायक गुफाएं बनाई गईं। बुद्ध की वो मूर्तियां भी इसी पत्थर से बनाई गई थीं।

साथ ही हजारा समुदाय के सूत्रों ने यह भी पुष्टि की है कि अफगानिस्तान की लेडी गवर्नर सलीमा मजारी को अब तालिबान ने हिरासत में ले लिया है। अफगानिस्तान की सलीमा मजारी बल्ख प्रांत की चारकिंत ज़िले की महिला गर्वनर हैं, जो बीते कुछ दिनों से तालिबान से लोहा लेने के लिए अपनी सेना बना रही थीं। हजारा के एक समूह ने ट्वीट किया कि हजारा समुदाय के सूत्रों ने पुष्टि की है कि सलीमा मजारी अब तालिबान की हिरासत में हैं। वह चारकिंत, बल्ख की राज्यपाल हैं।

बता दें कि यह घटना ऐसे वक्त में सामने आई है, जब तालिबान ने सभी अफगान सरकारी अधिकारियों के लिए “सामान्य माफी” की घोषणा की और उनसे काम पर लौटने का आग्रह किया, जिसमें शरिया कानून के अनुरूप महिलाएं भी शामिल थीं।

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