अरुण जेटली को दी गयी मुखाग्नि, शेष रह गईं सिर्फ स्मृतियां

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पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार दोपहर दुनिया को अलविदा कह दिया। अंतिम संस्कार के साथ जेटली दुनिया को बस यादों के साथ पीछे छोड़ गए। निगमबोध घाट में राजकीय सम्मान से उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार हुआ। उनके बेटे रोहन जेटली ने उन्हें मुखाग्नि दी।

सुबह 11 बजे उनके पार्थिव शरीर को उनके आवास से बीजेपी मुख्यालय में लाया गया था। दोपहर डेढ़ बजे बीजेपी मुख्यालय से उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई। आईटीओ से होते हुए उनकी यात्रा निगमबोध घाट पर ख़त्म हुई। ढाई बजे उनका पार्थिव शरीर घाट पहुँच चुका था। इसके आधे घंटे बाद उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो गई। तीन बजकर पंद्रह मिनट पर उनका दाह संस्कार किया गया। उनके बेटे रोहन जेटली ने उनके शव को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के समय घाट पर जेटली के करीबियों सहित कई राजनीतिक हस्तियां भी मौजूद थी। गृहमंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल, जेपी नड्डा, स्मृति ईरानी, बाबा रामदेव, नीतीश कुमार सहित विपक्ष के कपिल सिब्बल, ज्योतिरादित्य सिंधिया निगम बोध घाट पर मौजूद थे। उनके अंतिम संस्कार के समय दिल्ली का मौसम भी ग़मगीन था। घाट और आसपास के इलाको में काफी देर तक बारिश हुई।

देश की प्रगति में योगदान

स्वर्गीय अरुण जेटली ने देश की प्रगति में काफी योगदान दिया था। वाजपेयी सरकार में रक्षा मंत्री और मोदी सरकार में वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने भारतीय इतिहास के कई बड़े कदम उठाए। जीएसटी, मुद्रा योजना, विमुद्रीकरण, आयुष्मान योजना और कई बड़े कार्यों में जेटली की भूमिका को हमेशा याद रखा जाएगा। आपको बता दें कि जेटली को स्वास्थ सम्बन्धी परेशानियां थी। उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी। उन्हें सॉफ्ट टिश्यू सरकोमा नाम का कैंसर था। 9 अगस्त को उन्हें दिल्ली के AIIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां कई दिनों से उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था।

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