जनाक्रोश और जनक्रांति यात्रा के बाद समाजवादी पार्टी की ‘जनादेश यात्रा’ आज से शुरू

लखनऊ. जनाक्रोश और जनक्रांति यात्रा के खत्म होने के बाद समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) अपने राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री इन्द्रजीत सरोज की अगुवाई में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के विभिन्न जिलों में बुधवार से जनादेश यात्रा (Janadesh Yatra) के तहत भ्रमण व जनसम्पर्क कार्यक्रम शुरू करने जा रही है. उधर दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल 55 जिलों में चलने वाली ‘किसान-नौजवान और पटेल’ यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं. दरअसल, विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने सत्ता में वापसी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. इन यात्राओं के जरिए पार्टी सरकार की नाकामी और सपा सरकार में हुए विकास कार्यों को लेकर जनता के बीच में जा रही है और एक बार फिर 2022 में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने की अपील कर रही है.

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी की दोषपूर्ण नीतियों से जनता बेहाल है. दलितों-पिछड़ों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है. बीजेपी सरकार लोकतंत्र की हत्या करने पर उतारू है. बेरोजगारी की समस्या से नौजवानों का भविष्य अंधकारमय हो गया है. किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं. महिला उत्पीड़न और बलात्कार की घटनाओं से यूपी की छवि खराब हो रही है. प्रदेश की जनता बीजेपी सरकार के खिलाफ है. अखिलेश यादव ने कहा कि 2022 में सूबे की खुशहाली और तरक्की के लिये ‘जनादेश यात्रा’ इन्हीं उद्देश्यों के साथ जनसंवाद करेगी.

सपा की जनादेश यात्रा का क्या है रुट और कार्यक्रम
28 दिनों तक चलने वाली ‘जनादेश यात्रा’ 23 जिलों में जाएगी। इसकी शुरूआत आज यानी 1 सितम्बर 2021 को पीलीभीत से हो रही है. 2 सितम्बर को शाहजहांपुर, 4 सितम्बर बहराइच-श्रावस्ती, 5 सितम्बर बलरामपुर-गोण्डा, 8 सितम्बर सोनभद्र, 9 सितम्बर मिर्जापुर, 10 सितम्बर भदोही, 11 सितम्बर प्रयागराज, 12 सितम्बर फतेहपुर, 13 सितम्बर प्रतापगढ़, 15 सितम्बर जौनपुर, 16 सितम्बर वाराणसी, 17 सितम्बर गाजीपुर, 18 सितम्बर चंदौली, 21 सितम्बर लखीमपुर खीरी, 22 सितम्बर सीतापुर, 23 सितम्बर हरदोई, 24 सितम्बर उन्नाव, 26 सितम्बर रायबरेली, 27 सितम्बर अमेठी और 28 सितम्बर को सुल्तानपुर में इस यात्रा का समापन होगा. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री इंद्रजीत सरोज को इस यात्रा पर लगाकर समाजवादी पार्टी जातीय समीकरण को भी साधने की कोशिश कर रही है.

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